• June 6, 2026 6:08 am

देश के कई राज्यों में मिले जीका वायरस के सुबूत, एक ही नमूने में मिले जीका, डेंगू और चिकनगुनिया

ByPrompt Times

Jun 23, 2022
Share More

|23 जून 2022 पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की डॉ. प्रज्ञा यादव ने बताया, जांच पूरी होने के बाद जब संक्रमित नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई तो हमें पता चला कि जीका वायरस का एशियाई वैरिएंट ही मरीजों में है।

विस्तार

जीका वायरस के प्रसार को लेकर वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिये बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों को देश के कई राज्यों में जीका वायरस के प्रसार से जुड़े सुबूत मिले हैं जिसके आधार पर वैज्ञानिकों ने राज्यों से तत्काल जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के लिए कहा है।

नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधीन देश के अलग-अलग केंद्रों ने मिलकर यह पता लगाया है कि देश के एक या दो नहीं बल्कि कई हिस्सों में जीका वायरस की मौजूदगी है। इस संक्रमण के साथ साथ डेंगू और चिकनगुनिया की भूमिका भी सहायक के तौर पर देखने को मिल रही है। 

यानी एक ही मरीज में जीका के अलावा डेंगू या फिर चिकनगुनिया का असर भी मिल रहा है और जब इनकी जांच की गई तो पता चला कि इन मरीजों में सहायक संक्रमण है जोकि देश में अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। मेडिकल जर्नल फ्रंटियर्स में प्रकाशित इस अध्ययन में साफ तौर पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि बीते कुछ समय में भारत में जीका वायरस की गंभीर स्थिति देखने को मिली है। पिछले वर्ष अलग-अलग राज्यों से कई मामले भी सामने आए थे।

1475 मरीजों में 67 में मिले वायरस
आईसीएमआर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. निवेदिता गुप्ता ने बताया कि पिछले साल मई से अक्तूबर के बीच देश के 13 राज्यों से 1475 मरीजों के नमूने एकत्रित करने के बाद जांच की गई थी। इस दौरान 67 मरीजों में जीका वायरस, 121 में डेंगू और 10 मरीजों में चिकनगुनिया की पुष्टि हुई। जीका वायरस के सभी मामले लक्षण ग्रस्त थे। 

इनमें से 84 फीसदी रोगियों को बुखार और 78 फीसदी को शरीर पर लाल चकते उभरने के लक्षण थे। डॉ. गुप्ता ने कहा, हमारे लिए चौंकाने वाली स्थिति तब आई जब कुछ नमूनों में हमने जीका-डेंगू, जीका-चिकनगुनिया और डेंगू-चिकनगुनिया व जीका तीनों एक साथ देखे। अगर आगामी दिनों में यह प्रसार और बढ़ता है तो देश के लिए काफी चिंताजनक हालात हो सकते हैं।

एशियाई वैरिएंट मिला मरीजों में
पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की डॉ. प्रज्ञा यादव ने बताया, जांच पूरी होने के बाद जब संक्रमित नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई तो हमें पता चला कि जीका वायरस का एशियाई वैरिएंट ही मरीजों में है। जबकि डेंगू के हमें चारों प्रकार के सीरो टाइप मिले हैं। आमतौर पर एक सीजन में एक या दो ही तरह के सीरो टाइप का प्रसार देखने को मिलता है लेकिन अब यह कहा जा सकता है कि देश के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग सीरो टाइप डेंगू का प्रसार हो रहा है।

Source;-“अमरउजाला”  


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *