• June 8, 2026 7:58 am

एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों के गबन और कालाबाजारी के मामले में पिता-पुत्र गिरफ्तार

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महासमुंद। एलपीजी गैस से भरे करोड़ों रुपए की कैप्सूल ट्रकों के गबन और कालाबाजारी के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर को महासमुंद पुलिस ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर के न्यू चालुक्य होटल से गिरफ्तार कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस इससे पहले चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक मामले की विवेचना अभी जारी है और गैस हेराफेरी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
गुरुवार पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में पत्रकारों के समक्ष मामले का खुलासा करते हुए बताया कि दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए महाराष्ट्र के एक होटल में छिपकर रह रहे थे। उनकी तलाश में महासमुंद पुलिस ने रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर तक अलग-अलग टीमें रवाना की थीं। सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा डेटा और तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को सूचना मिली कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश देकर शांति बिहार कालोनी डगनिया थाना डीडी नगर रायपुर निवासी संतोष सिंह ठाकुर (57) और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर (27) को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने संतोष ठाकुर के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद भी जब्त किया है। एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि सिंघोड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 96/25 के तहत 24 दिसंबर 2025 को 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए इन वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर खाद्य विभाग की मौजूदगी में 30 मार्च 2026 को इन्हें ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स, उरला रायपुर के संचालक संतोष सिंह ठाकुर के सुपुर्द किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि सुपुर्द किए गए ट्रकों में से 5 कैप्सूल ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस (कीमत लगभग 77 लाख रुपए) का आपराधिक षड्यंत्र के तहत गबन कर लिया गया। पुलिस ने इसे आपराधिक न्यास भंग, कूट रचना और कालाबाजारी का गंभीर मामला मानते हुए संतोष ठाकुर सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया था।


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