29 दिसंबर 2023 ! अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो रहा है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की रूपरेखा तय हो गई है. 22 जनवरी के मुख्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा, लेकिन 15 जनवरी से ही पूजा-पाठ और अनुष्ठान जैसे कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे. प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को दोपहर 12:15 से लेकर 12:45 के बीच में संपन्न होगा. प्राण प्रतिष्ठा के दौरान राम मंदिर के गर्भ गृह में केवल पांच लोग ही मौजूद रहेंगे, जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान होंगे. संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति को विराजमान कराएंगे और फिर भगवान के आंख की पट्टी खोलकर उन्हें आईना दिखाएंगे. इसके बाद पीएम मोदी भगवान श्रीराम को सोने के सिक्के से काजल लगाएंगे. पीएम मोदी के द्वारा ही रामलला की महाआरती संपन्न की जाएगी. रामलला की आरती में भी मुख्य यजमान प्रधानमंत्री सहित गर्भ गृह में रहने वाले यही पांच लोग शिरकत करेंगे. प्राण प्रतिष्ठा के दौरान गर्भ गृह में मौजूद रहने वाले पांच लोग के जरिए पांच बड़े सियासी संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है?
राम मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान होंगे, जिसका सीधा संदेश है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का सपना साकार के पीछे उनकी अहम भूमिका रही है. सुप्रीम कोर्ट से भले ही राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया हो, लेकिन बीजेपी नेता इसका श्रेय पीएम मोदी को देते रहे हैं. नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो रामलला के दर्शन किए. 5 अगस्त 2020 को रामजन्मभूमि पर भूमिपूजन करके राम मंदिर की बुनियाद रखी थी और अब प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मुख्य यजमान की भूमिका अदा करेंगे. इस तरह राम मंदिर की स्थापना से लेकर रामलला को विराजमान करने तक की अगुवाई पीएम मोदी ने किया. इससे यह संदेश देना है कि पीएम मोदी जो कहते हैं यानि हिंदुत्व की पृष्ठभूमि में कहते हैं, उसे करके दिखाते हैं.
सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष “
