31 अगस्त 2022 | हम नेपाल वासियों के लिए भारत देश प्रेरक देश के रूप में हमारे हृदय में स्थित है। क्योंकि भारत देश मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की भूमि है। जिस उद्देश्य से हम भारत आए कि हमारा आध्यात्मिक विकास हो जो हमारी संस्कृति उन्नत रही है और भी उन्नत हो और जो गोमय संस्कृति ही ज्ञानमय संस्कृति है। यह विश्व के लिए एक उदाहरण है। इस भाव को लेकर हम भारत से नेपाल जा रहे हैं। उक्त उद्गार नेपाल दल के लीडर साहित्यकार व गीतकार पुरु लम्साल ने “आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र- आदर्श गौशाला” लाल टिपारा मुरार में चल रही गौ सेवा के अवलोकनार्थ व्यक्त किए।
सबसे पहले नेपाल दल के सदस्यों ने गौ पूजन किया व वृक्षारोपण किया। कवि अनिल श्रेष्ठ ने अपने उद्गार में कहा कि आदर्श गौशाला में यहां जो सेवा के प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। वह प्रकल्प नेपाल में भी चल सके और इस तरह की गौशाला का संचालन नेपाल में हो और वास्तव में समृद्धि गाय से है। इस भाव को लेकर हम जा रहे हैं। स्वामी ऋषभदेवानन्दजी महाराज ने अपने आशीर्वचन कहा कि गौ माता की सेवा और सनातन संस्कृति से हम किस प्रकार जुड़े हुए हैं। सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक पहलुओं को भी स्वामी जी ने अपने उद्गार में व्यक्त किए।
सोर्स :-” पंजाब केसरी”
