• June 4, 2026 8:25 pm

बाप-दादा की शराब: महारानी महनसर की खुशबू से खींचे चले आते हैं लोग

Share More

यूं तो हम सभी जानते हैं कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। साथ ही तमाम पाठकों को अवगत कराता है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। आप जब कभी कोई पीरियड फिल्म या सीरियल देखते हैं तो उसमें कई बार राजा-महाराजाओं को शराब पीते हुए दिखाया जाता है। ऐसे में मन में सवाल उठता है कि आखिर हमारे राजा महाराज कौन सी शराब पीते थे। क्या उनकी शराब आजकल बाजार में मिलने वाली शराब से अलग होते थे। आपके इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमने भारत के ट्रेडिशनल शराब के बारे में जानने की कोशिश की, जिसमें पता चला कि राजस्थान की शराब सबसे ज्यादा शाही होते हैं। इन शाही शराब में ‘महारानी महनसर शाही गुलाब’ एक ऐसा ब्रांड है जिसका इतिहास और स्वाद वाकई लाजवाब है। इसे आम बोलचाल की भाषा में दादा-परदादा की शराब कहा जाता है। इस शराब का सेवन राजा महाराजा किया करते थे।

 

महारानी महनसर कैसे तैयार होता है?
महारानी महनसर एक ग्रेन बेस्ड शराब है। इसको बनाने के लिए प्रीमियम गुलाब का प्रयोग किया जाता है। इसमें प्रयोग होने वाले गुलाब को अजमेर जिले के पुष्कर जिले से लाया जाता है। क्योंकि वहां सबसे अच्छी क्वालिटी के गुलाब मिलते हैं। सुबह में गुलाब को तोड़कर शाम तक रेडी किया जाता है। उसके बाद मेंचुरेशन और फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। ताजे गुलाब के मेंचुरेशन और फर्मेंटेशन की प्रक्रिया करीब पांच से 15 दिनों तक होती है। इस दौरान ड्राई फ्रूट्स और विभिन्न किस्म के मसालों को भिगोया जाता है। उसके बाद कॉपर से बने एक खास किस्म की बर्तन में तीन बार डिस्टिल किया जाता है। तैयार होने के बाद इस शाही शराब का खास कलर निखर कर आता है। यह बिल्कुल ही गुलाबी रंग का होता है। यहां बता दें कि यह शराब खास ज्यादा महंगी नहीं है। सरकार इसपर काफी सब्सिडी देती है इसलिए इसकी बोतल 1000 से 1500 रुपये के रेट में अलग-अलग राज्यों में उपलब्ध है।

कहां ईजाद हुआ ‘महारानी महनसर शाही गुलाब’
राजस्थान के शेखावटी इलाके के महनसर राजघराने के राजा करणी सिंह ने अपने जीवन काल में ऋषियों से बातचीत करके जड़ी बूटियों का प्रयोग कर करीब 50 किस्म की शराब का फॉर्म्यूला तैयार किया था। माना जाता है कि करणी सिंह ने ही ‘महारानी महनसर शाही गुलाब’ शराब के ब्रांड को तैयार किया था। 1768 में महनसर के किले का निर्माण हुआ था। तभी यहां एक ड्रिंक फेमस हुआ जिसे रजवाड़ी दारू कहा जाता था, जो आज महारानी महनसर के नाम से जाना जाता है। यह शराब गुलाब की ताजा पंखुड़ियों, ड्राई फ्रूट्स, विभिन्न मशालों के 150 से ज्यादा सिक्रेट रेसिपी के डिस्टलाइजेशन की लंबी प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। यहां बता दें कि आजादी के बाद भारत सरकार ने इन हेरिटेज शराब को बैन कर दिया था। 1998 में राजस्थान सरकार हेरिटेज शराब बिल को दोबारा लेकर आई ताकि भारत के ऐतिहासिक शराब निर्माण की सीक्रेट को बचाया जा सके। साल 2003 में राजेंद्र सिंह शेखावत ने शेखावटी हेरिटेज हर्बल प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की।

साल 2016 में राजस्थान के एक्साइज विभाग से शेखावटी हेरिटेज हर्बल प्राइवेट लिमिटेड को महनसर से करीब 60 किलोमीटर दूर चूरू जिले में एक कॉपर बेस्ड हेरिटेज शराब बनाने की यूनिट स्थापित करने की मंजूरी मिली। तभी से हेरिटेज शराब दोबारा से ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सप्लाई होने लगी। महारानी महनसर मार्केट में पांच तरह के फ्लेवर में मौजूद है, जिसमें मिंट, सोमरस आदि हैं। यहां बता दें कि यह शराब हेरिटेज सेगमेंट में आता है। इसपर सरकार काफी सब्सिडी देती है ताकि राजस्थान की शाही शराब बनाने की विधि को बचाया जा सके।

महारानी महनसर को कैसे पीयें?महारानी महनसर को पीने का तरीका भी शाही है। इसे ग्लास में करीब 30ML लें। इस शराब को आप जैसे ही ग्लास में डालेंगे वहां का वातावरण गुलाब की खूशबू से सुगंधित हो जाएगा। इसकी खूशबू आपको अपनी ओर आकर्षित करती है। इसको आप नीट भी पी सकते हैं। इसके अलावा आप इसे आइस क्यूब के साथ भी ले सकते हैं। ग्लास में आइस क्यूब जाते ही महारानी महनसर का अरोमा निखर जाता है। मुंह में जाते ही आपको लगेगा कि जैसे आप गुलाब के गुलदस्ते को चबा रहे हैं। आपको गुलाब के साथ विभिन्न मसालों का भी टेस्ट फील होगा। महारानी महनसर के बारे में कहा जाता है कि यह पीने वालों को दीवाना बना लेता है। हालांकि सभी पाठकों को एक बार फिर से सतर्क किया जाता है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। आप इसको यूज करने से परहेजे करें।


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *