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Gujarat: आठ साल से अमेरिकी में रह रही शिक्षिका उठा रही लाखों की सैलरी, बनासकांठा में आया लापरवाही की अजीबोगरीब मामला

ByPrompt Times

Aug 9, 2024
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बनासकांठा के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका करीब आठ सालों से अमेरिका में रहती है और छात्रों को बिना पढ़ाए ही लाखों रुपये की सैलरी पाती है। सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में काम करने वाली भावनाबेन पटेल पर आरोप है कि वह अमेरिका में रह रही है लेकिन उसका नाम अभी भी कक्षा पांच की प्रधान शिक्षिका के रूप में चल रहा है।

Gujarat: आठ साल से अमेरिकी में रह रही शिक्षिका उठा रही लाखों की सैलरी, बनासकांठा में आया लापरवाही की अजीबोगरीब मामला

गुजरात में शिक्षा विभाग की लापरवाही का मामला सामने आया है। दरअसल, बनासकांठा के अंबाजी से सात किलोमीटर दूर पंचा गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका करीब आठ सालों से अमेरिका में रहती है और छात्रों को बिना पढ़ाए ही लाखों रुपये की सैलरी पाती है।

साल में एक बार आती हैं गुजरात

सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में काम करने वाली भावनाबेन पटेल पर आरोप है कि वह अमेरिका में रह रही है, लेकिन उसका नाम अभी भी कक्षा पांच की प्रधान शिक्षिका के रूप में चल रहा है। उनके पास ग्रीम कार्ड भी है। भावनाबेन गुजरात में एक साल में एक बार आती हैं और परीक्षा देकर लाखों रुपये की सैलरी पाती हैं। भावनाबेन के स्कून न जाने के कारण कई बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

 

 

शिक्षा मंत्री ने कही कार्रवाई की बात

वहीं, इस मामले में राज्य के शिक्षा मंत्री का बयान सामने आया है। शिक्षा मंत्री कुबेर डिंडोर ने कहा कि चालू ड्यूटी के दौरान विदेश में रहने वाले सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के विवरण पर एक रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी और राज्य के सभी स्कूलों की जांच की जाएगी और विवरण मांगा जाएगा। ड्यूटी से अनुपस्थित और विदेश में रहने वाले सभी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिला शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?

मामले पर स्कूल के प्रभारी प्राचार्य ने कहा कि इस संबंध में शिक्षा मंत्री और जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिक्षिका के स्कूल नहीं आने के कारण बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य खराब हो रहा है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि भावनाबेन आठ महीने से स्कूल नहीं आई हैं, जिसके कारण उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया है।

 

SOURCE – JAGRAN

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