• June 5, 2026 12:25 am

हेनरी किसिंजर का 100 साल की उम्र में निधन, जानिए क्यों थे ख़ास

Share More

30  नवंबर 2023 ! हेनरी किसिंजर की पहचान एक स्कॉलर, स्टेट्समैन और दिग्गज डिप्लोमैट की रही है. अमेरिका की विदेश नीति में हेनरी किसिंजर की अमिट छाप मानी जाती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जेरल्ड फोर्ड की सरकार में हेनरी किसिंजर के पास ही विदेश नीति की कमान थी.

राजनीति से रिटायर होने के बाद भी किसिंजर अपनी लेखनी से वैश्विक राजनीति को प्रभावित करते रहे.

एक बयान में किसिंजर एसोसिएट्स ने बताया है कि जर्मनी में पैदा हुए पूर्व राजनयिक हेनरी किसिंजर का निधन कनेक्टीकट में उनके घर में हुआ.

अपने दशकों लंबे करियर के दौरान हेनरी किसिंजर ने अमेरिकी विदेश नीति और सुरक्षा नीति में अहम और कई बार विवादित भूमिका निभाई.

किसिंजर एसोसिएट्स की तरफ़ से जारी बयान में उनकी मौत का कारण नहीं बताया गया है.

हेनरी किसिंजर का जन्म 1923 में जर्मनी में हुआ था. नाजी जर्मनी के दौर में उनका परिवार 1938 में भागकर अमेरिका पहुंचा था.

किसिंजर 1943 में अमेरिकी नागरिक बन गए. इसके बाद तीन साल तक उन्होंने अमेरिका सेना में सेवा की और बाद में वो काउंटर इंटेलिजेंस कोर में शामिल हो गए.

बैचलर, मॉस्टर और पीएचडी की डिग्री लेने के बाद उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेसंश का अध्यापन किया.

किसिंजर अकेले ऐसे व्यक्ति रहे जो एक ही समय में राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और अमेरिका के विदेश मंत्री रहे. उनकी अमेरिकी विदेश नीति पर ऐसी पकड़ थी जो किसी अन्य व्यक्ति की नहीं रही.

निक्सन के प्रशासन में और बाद में जेराल्ड फोर्ड के प्रशासन में विदेश मंत्री रहते हुए, हेनरी किसिंजर ने चीन पर केंद्रित कूटनीतिक प्रयासों का नेतृत्व किया.

उन्होंने 1973 में इसराइल और उसके पड़ोसियों के बीच छिड़े योम किपूर युद्ध के समापन के लिए वार्ता में मदद की. वियतनाम युद्ध के समापन के लिए हुए पेरिस शांति समझौते में भी किसिंजर ने अहम भूमिका निभाई.

हालांकि, किसिंजर को उन लोगों से तीखी आलोचना का भी सामना करना पड़ा, जिन्होंने उन पर मानवाधिकारों पर सोवियत संघ के साथ प्रतिद्वंद्विता को तरजीह देने के आरोप लगाये.

उन पर चिली में अगस्तो पिनोशे के शासन सहित दुनिया भर में दमनकारी शासन का समर्थन करने का आरोप भी लगाया गया.

1973 में उत्तरी वियतनाम के ले डूक थो के साथ हेनरी किसिंजर को संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था. हालांकि, डूक थो ने पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था.

इस पुरस्कार को लेकर विवाद भी हुआ था और इसके बाद नोबल पुरस्कार समिति के दो सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया था.

किसिंजर ने 1977 में सरकारी सेवा छोड़ दी थी लेकिन वो सार्वजनिक मामलों पर एक अहम टिप्पणीकार बने रहे. अमेरिका के राष्ट्रपति और नीति निर्माता अक्सर विदेश नीति के मामलों पर उनसे सलाह मांगते.

वो कई कंपनियों के बोर्ड का भी हिस्सा रहे, वो सुरक्षा और विदेश नीति फोरम में अकसर शामिल होते. इसके अलावा उन्होंने 21 किताबें भी लिखीं.

  सोर्स :-“BBC  न्यूज़ हिंदी”                                  


Share More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *