9 दिसंबर 2023 ! बिहार के बेगूसराय जिला स्थित कावर झील को 2019 में केन्द्र सरकार ने जलीय इको सिस्टम संरक्षण के तहत देश के 100 झीलों में शामिल किया था. कावर झील बेहद खास है और विदेशी पक्षियों का भी कलरब देखने को मिलेगा. इस झील की संरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
कावर झील को पक्षी विहार का दर्जा 1987 में बिहार सरकार ने दिया था. यह झील 42 वर्ग किलोमीटर (6311 हेक्टेयर) के क्षेत्रफल में फैला हुआ है. इस झील में कश्मीर के डल लेक की तरह यहां भी आप बोटिंग का आनंद ले सकते हैं. बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते है. इसके आस-पास कई पिकनिक स्पॉट भी है. नव वर्ष में यहां सैर-सपाटे के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं.
बरसात के दिनों में कावर झील का क्षेत्रफल कई गुणा अधिक बढ़ जाता है. वहीं गर्मी में यह महज दो-चार हजार एकड़ में सिमट कर रह जाता है. हालांकि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने ध्यान देना शुरू किया तो 2019 के बाद से पानी नहीं सूख रहा है.
कावर (बर्ड संचुरी) में ठंड बढ़ने के साथ हीं साइबेरिया, अलास्का, रूस, मंगोलिया सहित सात समुद्र पार कर अनेक देशों से यहां पक्षियां पहुंचती है. जिसमें लालसर, दिधौंच, सरायर, कारण, डुमरी, अधंग्गी, बोदइन एवं कोइरा सहित करीब 59 प्रजाति के विदेशी पक्षी आते हैं. प्रवासी पक्षी ठंड शुरू होते हीं दिसम्बर माह से आना शुरू कर देते हैं और लगभग मार्च तक जमे रहते हैं.
बिहार के बेगूसराय जिला स्थित कावर झील के वॉच टॉवर से झील का आकर्षक नजारा देखने को मिलता है. यहां की खूबसूरती ऐसी है कि आपकी नजरें नहीं हटेगी. ठंड के मौसम में विदेशी पक्षियों का कलरब आपको आनंदित कर देगा. यदि आप आप घूमने का प्लान बना रहे हैं तो कावर झील खास हो सकता है और यहां पहुंचना भी आसान है.
सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”
