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ब्रह्मोस का ‘छोटा भाई’ बना रहे भारत-रूस, एक मिसाइल में होगी दो की ताकत, कापेंगे दुश्‍मन

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18 अप्रैल 2023 |  ब्रह्मोस मिसाइल जिसे भारत और रूस ने मिलकर तैयार किया है, अब वह कुछ देशों को निर्यात की जाएगी। मिसाइल को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। इस मिसाइल को बनाने वाले ब्रह्मोस एयरोस्‍पेस के सीईओ अतुल डी राणे ने मिसाइल के निर्यात से लेकर कई और बातों पर अहम जानकारी दी है। उन्‍होंने बताया है कि थाइलैंड, मलेशिया और वियतनाम इस मिसाइल को खरीदना चाहते हैं। उनका कहना था कि भारत जिन देशो को मान्‍यता देता है उन्‍हें इस मिसाइल की बिक्री की जाएगी। राणे ने रक्षा संबंधों को लेकर खुलकर बात की है। अतुल राणे ने इंटरव्‍यू में इस बात की आशंका को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि रूस के साथ काम करने की वजह से भारत पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं।

दक्षिण पूर्व एशिया में होती पॉपुलर
राणे से थाइलैंड, मलेशिया और वियतनाम की ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने की इच्‍छा से जुड़ा सवाल पूछा गया था। इस पर उन्‍होंने कहा, ‘हम हर उस देश को यह मिसाइल बेचेंग या फिर बेचने की बात करेंगे जिन्‍हें भारत और रूस सरकार की तरफ से मान्‍यता मिली हुई है। ऐसे में इन नामों का जिक्र होगा और दक्षिण पूर्व एशिया इसमें आगे है।’ राणे ने कहा कि पूरा दक्षिण पूर्व एशिया ब्रह्मोस का संभावित खरीदार है। राणे ने जानकारी दी कि वर्तमान मिसाइल सिस्‍टम को बेहतर बनाया जा रहा है और इसकी क्षमताएं बढ़ाई जा रही हैं। मिसाइल थाइलैंड, मलेशिया और वियतनाम में आयोजित होने वाले डिफेंस एक्‍सपो में जाने को तैयार है।

नई मिसाइल पर काम शुरू
उन्‍होंने यह भी बताया कि ब्रह्मोस की अगली पीढ़ी वाली मिसाइल पर भी काम शुरू हो चुका है। यह वर्तमान मिसाइल की तुलना में एक छोटी मिसाइल होगी लेकिन ऑपरेशंस में एक जैसी ही होगी। इसका साइज छोटा इसलिए रखा गया है ता‍कि एक ही एयरक्राफ्ट में दो मिसाइलें फिट हो सकें। इसका फ्लाइट ट्रायल साल 2024 के अंत में होगा और उत्‍पादन साल 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में होगा। इस मिसाइल को ब्रह्मोस NG नाम दिया गया है।

क्‍या भारत पर लगेगा प्रतिबंध
राणे से पूछा गया कि क्‍या रूस के साथ संबंधों की वजह से भारत पर प्रतिबंध लग सकता है? इस पर उन्‍होंने जवाब दिया, ‘भारत ने कुछ गलत नहीं किया है तो फिर ऐसे में भारत अपने लिए जो कुछ भी कर रहा है, उसकी वजह से उस पर प्रतिबंध लगेंगे, ऐसा नहीं होने वाला।’ उन्‍होंने कहा कि भारत सिर्फ अपनी रक्षा के लिए ही जरूरी कदम उठा रहा है। राणे ने कहा कि रूस के साथ काम करने की वजह से भारत पर प्रतिबंध लगेंगे, इसकी संभावना कम है।

क्‍या हाथ मिलाएंगे दूसरे देश
राणे से इस इंटरव्‍यू में यह भी पूछा गया कि भारत की रक्षा साझेदारी का रूस और दूसरे देशों के साथ क्‍या भविष्‍य है? इस पर उन्‍होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है निश्चित तौर पर उसमें भारत और रूस की बात होगी। पहले भी और अभी भी दोनों देश कई टेक्‍नोलॉजी पर मिलकर काम कर रहे हैं और ब्रह्मोस उसका सर्वश्रेष्‍ठ उदाहरण है। इस मिसाइल को बहुत ही एडवांस टेक्‍नोलॉजी के साथ बनाया गया है। रूस ऐसी कई टेक्‍नोलॉ जी पर भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है।

सोर्स :- “नवभारतटाइम्स”                    


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