09-दिसंबर-2021 | भारतीय किसान संघ ने बढ़े मंडी शुल्क को वापस लेने की मांग को लेकर कृषि मंत्री रविंद्र चौबे को ज्ञापन सौंपा है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रति 100 रुपये पर मंडी फीस 3 रुपये एवं कृषक कल्याण शुल्क 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अन्य अधिसूचित फसलों पर (धान को छोड़कर) 1 रुपये मंडी फीस एवं किसान कल्याण शुल्क 0.50 रुपये लिया जा रहा है। इस प्रकार से कुल मिलाकर कृषकों पर 6.50 रुपये मंडी शुल्क का भार आ रहा है। कहने को तो शुल्क व्यापारी पटाता है, लेकिन उसकी वसूली वह किसान से करता है। पहले मंडी फीस 2 रुपये थी एवं किसान कल्याण शुल्क 0.20 रुपये था। दोनों को जोड़ने के बाद पूर्व में 2.20 रुपये शुल्क था, जो अब बढ़ाकर दुगना कर दिया गया है। मंडी शुल्क बढ़ते ही व्यापारियों द्वारा धान का भाव 200 से 300 रुपये कम कर लिया जा रहा है। इसमें सीधा नुकसान किसानों का हो रहा है। वहीं कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में राइस मिलों को कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि 120 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाने की घोषणा की गई है, जो पहले शासन 40 रुपये देती थी। इसका अर्थ है सरकार दोनों तरफ से लाभ व्यापारियों का ही करवा रही है। एक तरफ जहां व्यापारी जितना मंडी शुल्क देना है वह पूरी राशि या उस राशि से अधिक की राशि लेकर किसानों की फसलों का भाव मद्दा कर किसानों को ठग रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार मिलिंग की दर बढ़ाकर व्यापारियों को तिगुना लाभ दे रही है। भारतीय किसान संघ का कहना है यदि ये सरकार किसानों की सरकार है तो सबसे पहले तो इस बढ़े शुल्क को वापस लिया जाए क्योंकि इसका सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है। साथ ही इस समस्या के स्थायी निदान के लिए सरकार द्वारा कानून लाकर मंडियों में समर्थन मूल्य से कम में खरीदी ना हो ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे किसानों का शोषण मंडियों में बंद हो और सभी फसलों का समर्थन मूल्य कृषकों को मिले। ज्ञापन सौंपने गए प्रतिनिधि मंडल में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डा. बिशाल चंद्राकर, प्रदेश महामंत्री नवीन शेष, उपाध्यक्ष टेकेंद्र चंद्राकर, कार्यालय मंत्री दुर्गा प्रसाद पाल और रायपुर जिले के मंत्री लोकेश्वर साहू उपस्थित रहे।
Source;-“नईदुनिया”
