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शिमला में अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव शुरू, केंद्रीय राज्य मंत्री ने किया उद्घाटन, गुलजार भी पहुंचे

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16 जून 2022 | अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव 'उन्मेष' की गुरुवार को शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के मुख्य सभागार में शुरुआत हो गई। इसका उद्घाटन  केंद्रीय संसदीय कार्य एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार और हिमाचल के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर भी विशेष रूप से मौजूद रहे।  उद्घाटन अवसर पर जाने-माने विद्वान और जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम भद्राचार्य ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि साहित्य के बिना भारत ही नहीं, विश्व का हाहाकार मिटाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि साहित्य वह विधा है, जो जीवन से पशुता को दूर करता है। पशु उतना घातक नहीं होता, जितनी पशुता होती है। 

केंद्रीय संसदीय कार्य एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ के लिए आए हुए सभी साहित्यकारों का वह अभिवादन करते हैं। बहुत से लोग पूछ रहे हैं कि ‘उन्मेष’ क्या है। इसका अर्थ प्रकट करना, सुबह-सुबह आंखें खोलना, खिलना, अभिव्यक्ति आदि को ‘उन्मेष’ को कहते हैं। भारत कैसा हो, इसका मनन करेंगे। करीब 425 लेखक, कवि, कलाकार आए हैं। 15 देशों के लोग आए हैं। यहां 60 भाषाओं के लोग हैं। ये आजादी का अमृत महोत्सव है। शिमला जैसे ऐतिहासिक शहर में यह साहित्यिक चिंतन बड़ा आयोजन है। शिमला में इस मंथन से अमृत निकालेंगे। ऐसा साहित्योत्सव प्रतिवर्ष करने का प्रयास करेंगे। यह अपनी तरह का पहला आयोजन है। यह प्रथम साहित्य सम्मेलन शिमला में हो रहा है। आदिसवासी साहित्य सृजन भी विषय रहा गया। 

विदेशों से आए साहित्यकारों के लिए तालियां बजवाईं
 इंग्लैंड, यूएसए, नेपाल, नीदरलैंड से आए लोगों के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने तालियां बजाईं। मेघवाल ने गेयटी के मुख्य सभागार में उन्हें हाथ खड़े करने को कहा। 

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन देश के खिलाफ कितना बोलना है, इसकी संविधान में कुछ बंदिशें भी : मेघवाल
 मेघवाल ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। लेकिन देश के खिलाफ कितना बोलना है, इसकी संविधान में कुछ बंदिशें भी हैं। इस बारे में भी हमारे महापुरुषों ने रास्ता दिखाया है। डॉ. बीआर अंबेडकर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खूब लाभ उठाया, उसमें महात्मा फुले, मैक्समूलर की कई बातों को भी काटा, जबकि फुले को वह गुरु मानते थे। डॉ. अंबेडकर ने सिद्ध किया कि आर्य बाहर से नहीं आए। वेद पुराने हैं, उनमें कई बार आर्य शब्द आया है तो वे कहां बाहर से आए। मेघवाल ने आह्वान ने कहा कि हिमाचल की संस्कृति को भी नजदीक से देखना, हिमाचल की लोक संस्कृति, खानपान के बारे में भी परिचय करवाना।

गुलजार ने की रिज-मालरोड की सैर
साहित्य उत्सव के लिए बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार गुलजार समेत कई गण्यमान्य प्रतिभागी शिमला पहुंचे हैं। गुलजार गुरुवार को मालरोड व रिज भी घूमे। इसके बाद गेयटी थियेटर पहुंचे। बता दें ‘उन्मेष : अभिव्यक्ति का उत्सव’ शीर्षक से आयोजित किए जा रहे इस उत्सव में 32 एलजीबीटीक्यू लेखक, 40 आदिवासी भाषाओं, 25 उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों, नौ प्रवासी भारतीय, नौ विदेशी लेखकों सहित 24 अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओं के 300 लेखक उपस्थित रहेंगे। यानी 64 आदिवासी-भारतीय भाषाओं में संवाद से युक्त यह उत्सव होगा।

सोर्स;-“अमरउजाला”  


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