09 दिसंबर 2022 | शासकीय नवीन लॉ कॉलेज में शिक्षकों पर लगे धार्मिक कट्टरता फैलाने के मामले में गाज गिरी है। साथ ही सबूत के तौर पर जिस किताब को अभाविप छात्र नेताओं ने पेश किया था, वो प्रदेश के अन्य कॉलेजों में तो नहीं पढ़ाई जा रही है, इसकी तस्दीक भी उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से करवाई गई है। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद मामले में कार्रवाई की गई है।
ये है वो किताब और उससे जुड़ा विवाद
लेखिका डॉ.फरहत खान की सामूहिक न्याय एवं दाण्डिक न्याय पद्धति किताब अभाविप छात्र नेताओं ने सबूत के तौर पर पेश की थी। किताब में विवादित कंटेंट लिखे गए हैं। स्टूडेंट ने आरोप लगाया था कि टीचर कक्षाओं में पढ़ाने के दौरान धार्मिक कट्टरता फैलाने का काम कर रहे हैं। किताब का रैफरेंस क्लास में दिया जाता है और स्टूडेंट को ये किताब पढ़ने के लिए टीचर कहते हैं।
ये बोले उच्च शिक्षा मंत्री यादव
उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने बताया कि प्रदेशभर के लॉ कॉलेजों में दिखवाया गया कि विवादित कंटेंट वाली किताब तो उनके यहां नहीं है। उससे पढ़ाया तो नहीं जा रहा है। प्रकाशक ने बयान दिए हैं कि जितनी भी किताबें थी, वो सब हमने बुलवा भी ली है।
कई स्टूडेंट पास आउट हुए, किताब से की पढ़ाई
वहीं दूसरी तरफ अभाविप छात्र नेताओं ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से ये किताब कॉलेज में लाइब्रेरी में रखी हुई थी। 2014 में इस किताब को कॉलेज में खरीदा गया। तब प्राचार्य डॉ.सुधा सिलावट थी। तब से लेकर अभी तक हर साल कई लॉ स्टूडेंट कॉलेज से पास आउट हुए हैं और किताब का विवादित कंटेंट उन्हें पढ़ाया गया है।
सोर्स :- “दैनिक भास्कर”
