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जेईई एडवांस्ड टॉपर ने आईआईटी बॉम्बे को ठुकराया, बीटेक के लिए इस इंस्टीट्यूट को चुना, बताई वजह

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22 अक्टूबर 2022 | जेईई एडवांस्ड परीक्षा 2022 में टॉप करने वाले बेंगलुरु के आरके शिशिर ने आईआईटी बॉम्बे की बजाय इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) को चुना है। शिशिर ने आईआईएससी के बीटेक इन मैथ्स एंड कंप्यूटिंग कोर्स में एडमिशन लिया है। आपको बता दें कि हर बार की तरह इस बार भी आईआईटी बॉम्बे जेईई एडवांस्ड टॉपरों की पहली पसंद रहा। जेईई एडवांस्ड के टॉप 100 रैंक होल्डर्स में से 69 और टॉप 500 रैंक होल्डर्स में से 173 स्टूडेंट्स ने आईआईटी बॉम्बे में पॉपुलर कोर्स को चुना।  ऐसे में शिशिर का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला है। शिशिर के संस्थान में दाखिला लेने पर आईआईएससी ने खुशी जाहिर की है। आईआईएससी ने ट्वीट कर कहा कि हमें बेहद खुशी है कि हमारे नए बीटेक मैथ्स और कम्प्यूटिंग कोर्स को शिशिर ने जॉइन किया है। भारत सरकार की एनआईआरएफ रैंकिंग 2022 में ओवरऑल बेस्ट इंस्टीट्यूट कैटेगरी में आईआईटी मद्रास के बाद आईआईएससी दूसरे स्थान पर था।

शिशिर ने पिछले सप्ताह आईआईएससी में ओरिएंटेशन प्रोग्राम में हिस्सा लिया। सोमवार से उनकी बीटेक इन मैथ्स एंड कंप्यूटिंग कोर्स की कक्षाएं शुरू हो गईं। उन्होंने कुछ दिन पहले ही आईआईटी बॉम्बे की सीट छोड़ी। टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक शिशिर ने आईआईटी बॉम्बे से बीटेक कंप्यूटर साइंस करने की बजाय आईआईएससी के बीटेक मैथ्स एंड कंप्यूटिंग कोर्स को इसलिए चुना क्योंकि वह रिसर्च में करियर बनाना चाहते हैं। खबर के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘जब मैंने ऑप्शन खंगाले तो मुझे पता चला कि आईआईटी बॉम्बे का बीटेक कंप्यूटर साइंस कोर्स मेरे लक्ष्य से मेल नहीं खाता। मुझे यह कोर्स जॉब ओरिएंटेड ज्यादा लगा। इससे मेरा मकसद पूरा नहीं होता। मैं रिसर्च और इंटरप्रिन्योरशिप में जाना चाहता हूं। आईआईएससी का बीटेक मैथ्स एंड कंप्यूटिंग कोर्स और कैंपस का स्वरूप मुझे मेरे लक्ष्य के हिसाब से ज्यादा उपयुक्त लगा।’

शिशिर ने कहा कि उन्होंने दोनों कोर्सेज की अच्छी तरह तुलना की है और जांचा परखा है। उन्होंने कहा, ‘आईआईएससी कोर्स में मैथ्स वाला हिस्सा ज्यादा है जो कि मुझे काफी पसंद है। इससे भविष्य में आगे जाकर मुझे फायदा होगा। मेरी किसी अच्छी विदेशी यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने की योजना है और आईआईएससी का बैकग्राउंड इसमें मेरी मदद करेगा।’

आईआईटी बॉम्बे छोड़ने से कई लोगों ने रोका
शिशिर ने कहा, ‘आईआईटी बॉम्बे को छोड़ने का फैसला आसान नहीं था। मुझे लग रहा था कि मैं आईआईटी बॉम्बे में इसलिए हूं क्योंकि सभी टॉपर यहां एडमिशन लेते हैं। मैं उस चीज पर फोकस नहीं कर पा रहा था जो मैं करना चाहता हूं, जो मेरा लक्ष्य है। मेरे कई दोस्तों व टीचरों ने मुझे आईआईटी बॉम्बे की सीट न छोड़ने की सलाह दी। लेकिन मैं स्पष्ट था।’

शिशिर ने आईआईएससी में अंतिम तिथि के दिन 14 सितंबर को आवेदन किया। उनके पिता आरवी कृष्णा कुमार ने कहा कि वे अपने बेटे के फैसले व चॉइस से सहमत थे।

17 वर्षीय शिशिर ने जेईई एडवांस्ड में टॉप करने से पहले कर्नाटक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (KCET) में फार्मेसी स्ट्रीम में भी टॉप किया था। साथ ही कर्नाटक सीईटी एग्जाम के इंजीनियरिंग कैटेगरी में चौथे स्थान पर रहे थे।  इसके अलावा किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना एग्जाम (KYPY) में वह ऑल इंडिया सेकेंड टॉपर थे। KYPY साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा प्रदान की जाने वाली एक प्रतिष्ठित फेलोशिप है।

सोर्स:–” हिंदुस्तान”                                             

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