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NTPC के कारण धंसा जोशीमठ? जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट आ गई, महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानिए

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30जनवरी 2024
जोशीमठ: 
उत्तराखंड के जोशीमठ में बड़े पैमाने पर भू-धंसान के मामले में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट सामने आई है। जनवरी 2023 में बड़े पैमाने पर जमीन धंसने से उत्तराखंड के चमोली जिले के तीर्थनगरी जोशीमठ में 65 फीसदी घर क्षतिग्रस्त हो गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऊंची इमारतों के रूप में अनियमित बुनियादी ढांचे के विकास और प्राकृतिक जल निकासी में गड़बड़ी को इसका कारण बताया गया है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के अनुसार, नाजुक पहाड़ में आई दरारों का कारण एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना नहीं थी। जीएसआई की रिपोर्ट में इस प्रकार के मामलों से बचाव के लिए उपाय भी सुझाव गए हैं।

जियो साइंटिस्ट और जियो टेक्नोलॉजिस्ट की अंतिम जांच रिपोर्ट में कई उपाय बताए गए हैं। इसमें जोशीमठ और औली के ढलानों के ऊपरी हिस्से में नए निर्माण की अनुमति नहीं देने की सिफारिश की गई है। साथ ह, निर्माण कार्य को सख्ती से जांच का सुझाव दिया गया है। जोशीमठ और औली की पहाड़ियों में सड़क चौड़ीकरण जैसी गतिविधियों से बचने की भी सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि जोशीमठ ढलान के निचले हिस्से में स्थित मारवाड़ी के जेपी कॉलोनी से गाद युक्त पानी के अचानक फैलने से के बाद पिछले साल मारवाड़ी, सिंगधार, मनोहरबाग और सुनील गांव में दरारें बनने लगीं।
जीएसआई की रिपोर्ट में घटना के कारणों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पानी का विस्फोट सतह के करीब उथली गहराई पर स्थित वाटर बॉडी में आई दरार के कारण हुआ था। एनटीपीसी की 520 मेगावाट तपोवन- विष्णुगढ़ जल विद्युत परियोजना के लिए सुरंग की ड्रिलिंग से रिसाव का इससे कोई संबंध नहीं था। वर्ष 2010 में तत्कालीन चमोली डीएम की ओर से मल्टी डिसिप्लनरी टीम से जांच कराई गई थी। टीम को भी जोशीमठ क्षेत्र में अस्थिरता उत्पन्न करने वाले सुरंग को लेकर किए जाने वाले दावे का कोई जमीनी सबूत नहीं मिला था। सुरंग 2011 में बनकर तैयार हुई थी।

लोगों ने परियोजना को बताया था जिम्मेदार

पनबिजली परियोजना का विरोध करने वाले लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पिछले साल 2 जनवरी से 8 जनवरी के बीच बड़े पैमाने पर हुए धंसाव के लिए सुरंग को जिम्मेदार ठहराया था। विशेषज्ञों की एक मल्टी डिसिप्लनरी की ओर से तैयार की गई राज्य सरकार की मूल्यांकन रिपोर्ट में सितंबर में कहा गया था कि टाउनशिप के 2152 घरों में से 1403 प्रभावित हुए थे। इसमें कहा गया है कि ‘बिल्ड बैक बेटर’ सिद्धांत के अनुरूप 472 घरों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। वहीं, 931 घरों की मरम्मत या रेट्रोफिटिंग की जानी थी।

अनियमित विकास से फूटा पानी

जीएसआई रिपोर्ट 1976 के बाद से कई मल्टी डिसिप्लनरी पैनलों के निष्कर्षों की तर्ज पर ही आई है। आम आदमी की भाषा में कहा जाए तो अनियमित विकास ने जोशीमठ क्षेत्र को सबसे अधिक अस्थिर किया है। यह रेतीले और मिट्टी की सामग्री के ढीले मैट्रिक्स वाले पत्थरों के भूस्खलन के कारणों का परिणाम है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली अनियोजित बुनियादी ढांचे के कारण जमा होने लगी तो वह फूटकर बाहर निकलने लगी। इसने संरचना और ढलानों को नष्ट कर दिया, जिससे धंसाव जैसी स्थिति उत्पन्न हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ में हाइड्रोजियोलॉजिकल स्थितियों और ढलान बनाने वाली सामग्री के संबंध में अलग स्थितियां दिखाई हैं। लोगों के अनियमित विकास में भागीदार होने के बाद इलाका अधिक संवेदनशील हो गया है। यही कारण है कि अधिकांश जमीन दरारें और धंसाव शहरी समूहों, बस्तियों और खेती योग्य भूमि में हुई हैं।

स्रोत-नवभारतटाइम्स

 


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