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पिथौरागढ़ में लिलियम फूलों की खेती बन रही है आजीविका का आधार

ByPrompt Times

Oct 1, 2020
पिथौरागढ़ में लिलियम फूलों की खेती बन रही है आजीविका का आधार
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पिथौरागढ़: हाॅलैंड के फूल लिलियम की डिमांड ट्यूलिप के बाद दुनिया में सर्वाधिक है। व्‍यावसायिक खेती के लिहाज से सफल उत्‍तराखंड में भी इसे अपनाया जा रहा है। सजावट के लिए सर्वाधि‍क डिमांड वाला ये फूल लोगों को स्‍वरोजगार मुहैया करा रहा है। यही कारण है कि पिथौरागढ़ में गेंदे के फूल की खेती के बाद लिलियम की खेती शुरू हो गई है। इससे जहां रोजगार के लिए शहरों का रुख करने वाले नौवजवान आर्थिक रूप से आत्‍म निर्भर होंगे वहीं दूसरों के लिए प्रेरणा का श्रोत बनेंगे। लिलियम फूल के बल्ब को हॉलैंड से मंगवाया जाता है। पिथौरागढ़ के मुनस्यारी तहसील के तल्ला जोहार और डीडीहाट के थल क्षेत्र में लिलियम की खेती हो रही है।

जंगली जानवरों से परेशान हो गए थे ग्रामीण

जंगली जानवरों के आतंक के चलते तल्ला जोहार में पलायन तेजी से हो रहा है और खेत बंजर पड़ते जा रहे हैं। इस क्षेत्र का चयन उत्त्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम विकास परियोजना के तहत हुआ। परियोजना के द्वारा एबीएसओ ग्राम्या -2 के तकनीकी सहयोग से इस क्षेत्र में लिलियम पुष्प के उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया गया। इससे पूर्व कोट्यूड़ा गांव में दिनेश बथ्याल द्वारा अपने प्रयासों से गेंदा पुष्प का उत्पादन प्रारंभ किया गया था। दिनेश के फूलों की बिक्री को देख कर क्षेत्र के काश्तकार आगे आने लगे।

इन गांवों में हो रही फूलों की खेती

थल के बलतिर, अठखेत, तड़ीगांव , दौलीकौली, उड़ी सिरतोली, द्यौकली और शौकियाथल और नाचनी के भैंसखाल, हुपुली, खेतभराड़, बरा, चामी भैंस्कोट गांवों में लिलियम की खेती हो रही है। सभी गांवों में मिला कर 24 परिवार फूलों की खेती से जुड़ चुके हैं।

सहकारिता के माध्यम से हो रही बिक्री

उगाए गए फूलों की बिक्री त्रिवेणी सहकारिता एवं उन्नति स्वायत्त्त सहकारिता के माध्यम से ग्रेडिंग और पैकेजिंग कर सीधे दिल्ली मंडी भेजा जा रहा है। जहां पर फूलों के व्यापारी हाथों हाथ खरीद रहे हैं। लिलियम के साथ गेंदा और गुलदावरी पुष्पों की खेती भी हो रही है। फूलों की खेती से अब मायूस हो चुके काश्तकारों के चेहरे भी खिलने लगे हैं।

इन प्रदेशों की जलवायु लिलियम की खेती के अनुकूल

लिलियम के फूल की खेती के लिए देश में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की जलवायु काफी उत्तम मानी जाती है। यह फूल सिर्फ 70 दिनों के अंदर ही बागवानी में किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इसके एक एकड़ में 90 हजार से एक लाख फूल आराम से तैयार हो जाते है।


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