10 जनवरी 2022 | हाई कोर्ट ने आर्य मंदिर गाजियाबाद को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्होंने युवती का मतांतर कर विवाह कराया था।
ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की युगल पीठ ने उस मामले में आर्य समाज मंदिर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश को पार्टी बनाकर नोटिस जारी कर दिए हैं, जिसमें आर्य समाज मंदिर गाजियाबाद ने एक युवति का मतांतरण कर विवाह कराया था। याचिका की सुनवाई 31 जनवरी को संभावित है। वैसे याचिकाकर्ता को मतांतरण के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी थी, लेकिन कोर्ट ने आर्य समाज मंदिर का पक्ष जानना चाहा है। यहां बता दें मतातंरण की प्रक्रिया प्रशासन स्तर से होती है।
शिवपुरी जिले के पिछोर निवासी राहुल उर्फ गोलू ने 17 सितंबर 2019 को घर से भागकर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। लड़की के पिता ने पिछोर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। दो साल बाद ये घर वापस लौटे तो थाने में उपस्थित हुए। दोनों विवाह की जानकारी दी, लेकिन गुमशुदगी का केस दुष्कर्म में बदल गया। लड़की ने पिता के साथ जाने से मना कर दिया। शिवपुरी के अपर कलेक्टर ने लड़की को नारी निकेतन भेज दिया। वह नारी निकेतन में रह रही है। राहुल जेल चला गया। जमानत मिलने के बाद वह बाहर आया।
राहुल ने पत्नी को नारी निकेतन से मुक्त कराने के लिए हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इस याचिका की सुनवाई युगल पीठ में हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दोनों दोनों की उम्र 18 साल से ज्यादा है और बालिग हैं। दोनों गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया है। विवाह से पहले लड़की का मतांतरण कराया। वह हिंदू हो गई है। वर्तमान में उसकी पत्नी नारी निकेतन में रह रही है। उसे नारी निकेतन से मुक्त किया जाए। विवाह के प्रमाण भी पेश किए। लड़की भी अपने बयानों में विवाह करना स्वीकार कर चुकी है। दोनों बालिग हैं, कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र हैं। मतांतरण के संबंध में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को जवाब देना है।
यह है मतातंरण की प्रक्रिया
किसी भी व्यक्ति को यदि मतातंरण करना है तो पहले उसे प्रशासन में आवेदन देना होता है। इसके बाद प्रशासन नाेटिस से लेकर विज्ञप्ति को अखबार में प्रकाशन करने जेसी प्रक्रिया करता है। इसके बाद ही कोई व्यक्ति अपना मतातंरण कर पाता है। इस प्रक्रिया में 15 से 1 माह का समय लग जाता है।
Source;-“नईदुनिया”
