08 फ़रवरी 2023 | शिवपुरी. मध्य प्रदेश का एक शहर जहां भगवान विष्णु सिंध नदी के बीच शयन मुद्रा में विराजमान हैं. प्रदेश में इस तरह की यह इकलौती प्रतिमा है, लेकिन दुखद पहलू यह है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह प्राकृतिक स्थान पर्यटन मानचित्र से गायब है.
शिवपुरी के कोलारस अनुविभाग से महज 10 किमी दूर पारागढ़ किला जंगल में प्रकृति के बीच अपने आप में एक इतिहास संजोए हुए है. प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण ऐतिहासिक पारागढ़ किला खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. किले में बिखरी पड़ी प्राचीन संपदाओं को जतन पूर्वक सहेजा जाता, तो यह किला मध्य प्रदेश के सबसे खूबसूरत स्थलों में शुमार होता.
चारों तरफ जंगल, पहाडी व हरियाली से घिरे व प्रकृति की गोद में बसे पारागढ़ के किले के समीप से सिंध नदी गुजरी है, जहां गर्मी में भी पानी की कल-कल करती जलधारा बहती है.
पारागढ़ किले के पास से बहती हुई सिंध नदी के बीचोंबीच चट्टान पर बनी विष्णु भगवान की प्रतिमा अद्वितीय है. प्रदेश की यह पहली विष्णु प्रतिमा है, जो कि नदी के बीच शयन मुद्रा में स्थापित है. जलस्तर कम होने पर ही भक्तों को इस प्रतिमा के दर्शन हो पाते हैं. सिंध नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण यह चट्टान जलमग्न हो जाती है.
पारागढ़ किले के अंदर स्थित कोलारस का एक मात्र शनिदेव मंदिर धर्मप्रेमियों की विशेष आस्था का केंद्र है. शनिश्चरी अमावस्या के दिन यहां सालों से मेला लगता आ रहा है. शनिदेव के दर्शन व पूजा करने कोलारस सहित दूर-दूर से शनिदेव को मानने वाले हजारों भक्त कच्चे, पथरीले व संकरे रास्तों का सफर तय कर यहां पहुंच पाते हैं.
यही नहीं, नदी किनारे बना पारागढ़ का ऐतिहासिक किला अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है,जहां हिंदू एवं जैन देवी-देवताओं की प्राचीन प्रतिमाएं मौजूद हैं.
पारागढ़ किले में खजाना होने की चर्चाओं ने भी इसे खंडहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्षों से खजाना पाने के लालच में लोग इस किले की मजबूत दीवारों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं. एकांत स्थान में होने के कारण भयमुक्त होकर खजाने के लालची लोगों ने इस किले को जमींदोज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
इतिहासकार बताते हैं कि पूर्व में इस स्थान को पथरीगढ़ के नाम से जाना जाता था, किसी समय यहां दर्जनो की संख्या में जैन मंदिर हुआ करते थे. मुगलों के आक्रमण के दौरान इन मंदिरों को खंडित किया गया. अवशेषों के रूप में किले के अंदर खंडित अवस्था में पड़ी जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां आज भी यहां मौजूद हैं.
सोर्स :-“न्यूज़ 18 हिंदी|”
