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कोविड-19 के बाद एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस पर शोध की आवश्यकता, स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश ने किया क्रांति

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14 नवंबर 2022 |  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एंटीमाइक्रोबियल स्ट्रूवर्डशिप पर आधारित तीन दिवसीय कांफ्रेंस एएसपीआइकान-2022 की शुरूआत हो गई है। कांफ्रेंस में भाग ले रहे विशेषज्ञों ने कोविड-19 के बाद एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस पर अधिक से अधिक डाटा इकट्ठा कर उस पर शोध और अनुसंधान की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. (डा.) बलराम भार्गव, पूर्व महानिदेशक, आईसीएमआर ने आजादी के बाद देश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में की गई प्रगति को प्रमुख क्रांतियों में से एक बताया।

‘बेड बग्स, नो ड्रग्स-टाइम टू एस्कलेट एएमएसपी मेजर्स’ विषयक कांफ्रेंस का उद्घाटन करते हुए प्रो. भार्गव ने भारत में कोविड-19 के खिलाफ किए गए संघर्ष को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत में आजादी के बाद आईटी, मोबाइल क्रांति का जिक्र सभी करते हैं मगर इसके अतिरिक्त हरित, श्वेत और नीली क्रांति के साथ भारत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी एक नई क्रांति की है। दुनिया में प्रत्येक छठवां चिकित्सक और पांचवी नर्स भारतीय है। भारत में स्वास्थ्य संस्थानों के पास वित्तीय संसाधनों के साथ ही उत्कृष्ठ मानव संसाधन भी उपलब्ध है। वर्तमान में 60 प्रतिशत जेनरिक दवाइयां और वैक्सीन भारत से पूरी दुनिया को प्रदान की जा रही हैं।

तीन हजार से अधिक डायग्नोस्टिक लैब का नेटवर्क तैयार

कोविड-19 के प्रारंभ से लेकर 2022 तक वैक्सीन अभियान के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व और इच्छाशक्ति की बदौलत भारत ने महामारी के एक साल के अंदर तीन हजार से अधिक डायग्नोस्टिक लैब का नेटवर्क तैयार कर लिया था। इसके साथ ही टेस्टिंग किट्स और सेरो सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कदम भी भारतीय चिकित्सकों और अनुसंधानकर्ताओं ने उठाएं। चुनौतीपूर्ण समय में देश के साथ पूरी दुनिया को वैक्सीन प्रदान कर भारत ने चिकित्सा क्षेत्र में स्वयं की ताकत को प्रदर्शित किया।

युवा चिकित्सकों का नेतृत्व

निदेशक प्रो. (डा.) नितिन एम. नागरकर ने एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस को लेकर भारतीय परिदृश्य पर आधारित शोध पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए युवा चिकित्सकों से आगे आकर नेतृत्व करने का आह्वान किया। इससे पूर्व कांफ्रेंस आयोजक प्रो. पद्मा दास ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन सचिव डा. तुषार जगझापे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दो दिवसीय वैज्ञानिक सत्रों में एंटीमाइक्रोबियल रेसिसटेंस के विभिन्न पहलुओं पर विमर्श कर चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा।

इस अवसर पर पीजीआई चंडीगढ़ की डा. नुसरत शफीक और एम्स, मंगलागिरी के डा. देबब्रत दास ने भी एएमआर पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डीन (अकादमिक) प्रो. आलोक चंद्र अग्रवाल, प्रो. विनय आर.पंडित, प्रो. अनुदिता भार्गव और डा. उज्जवला गायकवाड़ ने भी भाग लिया। इस अवसर पर कांफ्रेंस की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। कांफ्रेंस में हाइब्रिड मोड में 500 से अधिक चिकित्सक भाग ले रहे हैं।

सोर्स :-“नईदुनिया”                                


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