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छत्तीसगढ़ में अब खंडन अधिकारी की पोस्ट-स्कूल शिक्षा विभाग ने एक अफसर को दी हर समाचार के खंडन की जिम्मेदारी, जांच का सिस्टम बना ही नहीं

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02 मार्च 2022 | छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग गजब है। विभाग ने अब खंडन अधिकारी की पोस्ट भी बना ली है। इस अफसर को जिम्मा दिया गया है कि वह मीडिया माध्यमों में आ रहे स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े हर समाचार का खंडन करे। रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने इसके लिए बकायदा सहायक संचालक डी.एस. चौहान को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से मिले निर्देश के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग के विरुद्ध जो समाचार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आता है, उसका उसी दिन खंडन जारी किया जाना है। इसको प्राथमिकता देते हुए नोडल अधिकारी को प्रतिदिन समाचारपत्रों का अवलोकन करना है। उसमें भी स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े समाचार को जरूर देखना है। उनकी कटिंग का सावधानी से परीक्षण करना है। परीक्षण और विश्लेषण के बाद खंडन की प्रेस विज्ञप्ति बनाकर कार्यालय प्रमुख से अनुमोदन लेकर जनसंपर्क विभाग के जरिए प्रेस को जारी करना है।

प्रकाशित समाचार का संबंध अगर राज्य सरकार से है तो खंडन जारी करने से पहले लोक शिक्षण संचालक, सचिव अथवा प्रमुख सचिव की जानकारी में बात लानी होगी। इसके लिए एक हायरार्की भी तय की गई है। नोडल अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी के और जिला शिक्षा अधिकारी संयुक्त संचालक के संज्ञान में बात लाते हुए अंतिम विज्ञप्ति जारी करेंगे। संयुक्त संचालक शिक्षा को यह जानकारी संचालक लोक शिक्षण को देना है। मजेदार बात यह है कि इस पूरे आदेश में समाचार में उठाए गए तथ्यों की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की किसी प्रक्रिया के बारे में कुछ नहीं लिखा है।

अफसर कह रहे हैं इसे गलत समझा जा रहा है

लोक शिक्षण के संचालक सुनील जैन का कहना है कि इस आदेश की भाषा थोड़ी भ्रामक है, लेकिन भाव ठीक हैं। उस अधिकारी को हर समाचार का केवल खंडन नहीं करना है। समाचार की जांच कर सही तथ्य मीडिया के सामने रखने की जिम्मेदारी है। इससे विभाग से जुड़ी सही बात सामने आएगी।

अब तक कोई ध्यान नहीं दे रहा था

संचालक सुनील जैन का कहना था, अभी तक समाचारों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था। इसकी वजह से कई निगेटिव समाचार विभाग के बारे में छप रहे थे। इसी को ध्यान में रखकर तय हुआ कि समाचारों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाए ताकि तथ्याें को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे।

Source;-"दैनिक भास्कर"   

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