14 सितंबर 2022 | बस्तर की जेलों में कैदियों का हाल बेहाल है। उन्हें न तो भरपेट भोजन मिलता है और न ही परिजनों से मिलने दिया जाता है। यदि परिजन जेल में बंद अपने रिश्तेदारों को कुछ सामान भी देने जाते हैं तो वो भी अंदर आधा ही पहुंचता है। यह आरोप बीजापुर जिले में आंदोलन में बैठे सैकड़ों ग्रामीणों ने जेल प्रबंधन पर लगाए हैं। जिले के करीब 10 से ज्यादा गांव के ग्रामीण जेल की अव्यस्था के खिलाफ लामबंद हुए, रैली भी निकाली।
दरअसल, बुधवार को जिले के केशकुतुल, पोमरा, हल्लुर, पिटेतुंगाली समेत अन्य गांव के ग्रामीण पोंदुम में इकट्ठा हुए। गांवों के सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि, अपनी मांगों को लेकर लोग भैरमगढ़ आना चाहते थे, लेकिन सुरक्षागत कारणों से पुलिस ने इन्हें 5 किमी दूर पोंदुम में ही रोक दिया था। यहीं पर सैकड़ों ग्रामीणों ने विशाल रैली निकाली।
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि, साल 2018 के बाद से बस्तर के किसी भी जेल में व्यवस्था ठीक नहीं है। जेल में बंद कैदियों को काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, जिन ग्रामीणों ने आरोप लगाए हैं उनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो पहले किसी मामले में जेल की सजा काट कर आएं हैं। सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि, जेल में भरपेट भोजन नहीं मिलता। जितना मिलता भी है वह अच्छा नहीं रहता है। जेल में बंद अपने रिश्तेदारों से भी मिलने जाते हैं तो मिलने नहीं दिया जाता है।
ग्रामीण ने आरोप लगाया है कि पहले जाली लगी होती थी तो थोड़ी बहुत बातचीत हो जाती थी। लेकिन अब कांच लगा दिया गया है। इसी वजह से खुलकर बातचीत भी नहीं हो पाती है। यदि हम कुछ सामान अपने रिश्तेदारों को देते हैं तो आधा सामान ही उन तक पहुंच पाता है। बाकी सामान गेट पर ही रखवा लेते हैं। बाद में सामान का क्या होता है कुछ पता नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि जेल की व्यवस्था जल्द से जल्द सुधारी जाए।
Source:-“दैनिक भास्कर”
