19 अप्रैल 2022 | देश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस बीच आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजेश रंजन ने भी एसआईआर मॉडल के हवाले से दावा किया है कि भारत में आने वाली चौथी लहर दूसरी और तीसरी लहर से कम घातक होगी। वहीं, कोरोना को लेकर भविष्यवाणी करने वाले कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने भी दावा किया है कि कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना कम है।
प्रोफेसर अग्रवाल ने गणितीय मॉडल के आधार पर एक इंटरव्यू में कहा कि अब लोगों में इम्युनिटी 90% तक बन गई है। इससे वह कोरोना का सामना कर सकते हैं। हालांकि, लापरवाही बरती तो ये म्यूटेंट फिर से अपना असर दिखा सकते हैं। दूसरी ओर प्रोफेसर रंजन ने बताया कि उनके पास आए आंकड़ों के मुताबिक, चौथी लहर से खतरा कम है। प्रोफेसर रंजन ने कोरोना की चौथी लहर को लेकर दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत की है।
सवाल : देश में बढ़ रहे कोरोना के मामले क्या कोरोना की चौथी लहर की तरफ इशारा करते हैं?
जवाब : देखिए चौथी लहर देश में आएगी, लेकिन यह दूसरी और तीसरी लहर का मिश्रण होगा, जो ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी। देश में मिल रहे मामले इसी तरफ संकेत कर रहे हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इस बार जो म्युटेंट आया है, वो डेल्टा और ओमिक्रॉन से निकला है। इसकी मारक क्षमता डेल्टा के बराबर नहीं है।
सवाल : कितनी घातक हो सकती है यह लहर?
जवाब : कोरोना की चौथी लहर बिल्कुल सामान्य रहने वाली है, क्योंकि इसका म्युटेंट ओमिक्रॉन और डेल्टा से निकला है। जो नया म्युटेंट आया है वह XE है, जो ओमिक्रॉन के बीए-1 और बीए-2 से बनकर निकला है। इसमें कुछ मात्रा डेल्टा की भी है, जो लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
सवाल : किन लोगों को यह लहर नुकसान पहुंचा सकती है?
जवाब :अपने देश में लोगों को वैक्सीनेशन लगाने का कार्य करीब 93 प्रतिशत तक हो चुका है। यह एक अच्छी बात है। यह जो नया म्युटेंट है, वो वैक्सीन को बाईपास नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह हमारे देशों के लोगों की स्ट्रॉन्ग इम्युनिटी है। कई लोगों में कोरोना होने के बाद एंटीबॉडी जनरेट हुई है। इसके अलावा कुछ लोगों को कोरोना हुआ ही नहीं था, लेकिन उन्होंने वैक्सीन लगवाकर अपना बचाव किया।
इस लहर में सबसे ज्यादा उन लोगों को खतरा है, जिनको अभी तक कोरोना नहीं हुआ है और न ही उन्होंने वैक्सीन लगवाई है। संक्रमितों को कौन सा वैरिएंट है, यह तो सीक्वेंसिंग के बाद ही पता लगाया जा सकता है। यह जो नया म्युटेंट आया है, यह काफी संक्रामक है। लोकल लेवल पर यह जिस तरह से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह भी ओमिक्रॉन की तरह ही जल्द ही खत्म हो जाएगा।
सवाल : क्या इसमें बच्चे शामिल है, क्योंकि NCR में कई स्कूली बच्चे भी कोरोना की चपेट में आए हैं?
जवाब : बिल्कुल भी नहीं क्योंकि बच्चों की इम्युनिटी बहुत स्ट्रॉन्ग होती है। साथ ही सरकार ने बच्चों को भी वैक्सीन लगाने का काम शुरू कर दिया है। मगर, जिन बच्चों की इम्युनिटी कमजोर है, उनको यह थोड़ी तकलीफ दे सकता है। इस बार एडल्ट लोगों में भी इस नए वायरस के ज्यादा लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
सवाल : क्या कोरोना के इस नए वैरिएंट ने कोई परिवर्तन किया है?
जवाब : कोरोना ने अपने अंदर जो परिवर्तन किया है, उसे हम लोग रिकॉम्बिनेंट (पुनः संयोजक) बोलते हैं। यह नया वायरस जिस भी बॉडी में रहा होगा, उसमे एबी 1 और एबी 2 वर्जन पहले से रहा होगा। जब वह उस बॉडी को नुकसान नहीं पहुंचा सका होगा, तब इस वेरिएंट ने अपने डीएनए में परिवर्तन किया होगा, जो अब XE वेरिएंट के रूप में हमारे सामने है। यह ओमिक्रॉन का ही एक नया म्युटेंट है, जो धीरे-धीरे माइल्ड होता जाएगा।
सवाल : रेस्ट्रिक्शन के बाद भी हांगकांग, चीन, साउथ कोरिया जैसे देशों में कोरोना के वेरिएंट की चैन क्यों नहीं टूट रही?
जवाब :इसकी मुख्य वजह यह है कि उन देश के लोगों ने आज तक कोरोना को सीरियसली नहीं लिया। उन्होंने इसे एक आम बीमारी की तरह लिया है। चाहे कितने भी लोग की मौत हुई हो इस पैंडेमिक में, लेकिन भारत ने इसे बहुत ही अच्छे तरीके से डील किया है। क्या कभी हम लोगों ने सुना है कि चीन या साउथ कोरिया में पहली, दूसरी या तीसरी लहर आई। भारत के लोगों की इम्युनिटी बहुत स्ट्रॉन्ग हो चुकी है, तो अब इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
सवाल : कितना सावधान रहना चाहिए देशवासियों को?
जवाब :देखिए जिस तरह से मेरा आकलन है, उसे देखते हुए यह वायरस लोगों में ज्यादा संक्रमण फैलाएगा, लेकिन कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। निचले स्तर पर इससे सावधान रहने की जरूरत है। जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है, वो तुरंत वैक्सीन लगवाएं। साथ ही यह नया वेरिएंट अपना रूप बदले, इसकी उम्मीद कम है। मगर, यदि यह रूप बदलता है, तो घातक हो सकता है।
सवाल : क्या आप प्रो. मणींद्र अग्रवाल के आकलन से सहमत है?
जवाब :देखिए उनकी स्टडी अलग है मेरी अलग, न वो मेरी स्टडी के बारे में कुछ जानते है और न मैं उनकी स्टडी के बारे में जानता हूं। वो सीनियर हैं, उन्होंने अपना आकलन किया है।
Source;- ‘’दैनिक भास्कर’
