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नेशनल पार्क में नहीं बन पाएंगे सफारी-चिड़िया घर, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, विभाग आदेश लेगा वापस

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09 फ़रवरी 2023 | देश के नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर चिंता जताई गई थी। इस सिलसिले में बाघ अभ्यारण्य क्षेत्रों में टाइगर सफारी, चिड़िया घर या अन्य निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिस पर कोर्ट ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय को अपना आदेश वापस लेने के निर्देश दिए है। अदालत ने ऐसे सभी स्थानों पर किसी भी तरह के निर्माण पर भी पाबंदी लगा दी है।

वन्य प्राणियों से आबाद रहने वाले नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कई तरह के निर्माण के प्रस्ताव थे। उनमें मध्य प्रदेश के नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व को अनुमति मिली थी। टाइगर सफारी, चिड़िया घर जैसे निर्माण कार्य भी कई जगहों पर शुरू किए गए। लेकिन अब इन पर पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी लगा दी है। कोर्ट में दायर याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि बाघ अभ्यारण्य और अन्य पार्क में सफारी, चिड़िया घर निर्माण के आदेश वापस लिए जाएंगे।

दरअसल इस मामले में पहले हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। राष्ट्रीय बाघ अभयारण्य प्राधिकरण को जबाब देने के निर्देश जारी किए थे। आपको बता दें एमपी हाई कोर्ट में भी RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अवैध निर्माण को लेकर याचिका दायर की थी। जहां बफर जोन में बिना अनुमति सफारी निर्माण के भी आरोप लगाए गए। अजय दुबे का कहना है कि सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का अब सभी को पालन करना होगा। इससे वन्य जीवों का जीवन सुरक्षित रहेगा। दुबे ने पिछले कुछ सालों में नेशनल पार्क-टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती मौतों पर भी चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हम बाघ अभयारण्य या नेशनल पार्क में चिड़िया घर बनाने की समीक्षा नहीं कर सकते।


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