अगस्त 30 2023 ! छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के धर्मगुरु बालदास ने भाजपा का दामन थाम लिया है. इससे भाजपा एससी आरक्षित 10 सीटों में सीधे अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा कर रही है. राज्य में ओबीसी के बाद दूसरा एससी यानी सतनामी समाज का ही वोटबैंक में बड़ा प्रभाव पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि छत्तीसगढ़ में एससी प्रभावित सीटें ही भाजपा-कांग्रेस की जीत हार तय करती हैं.
छत्तीसगढ़ बनने के बाद से ही चुनाव में जातिगत समीकरण हावी हैं. इसका सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को ही मिला है. गुरु रुद्र कुमार और गुरु बालदास दोनों ही सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु हैं. यही वजह है कि समाज भी 2 भागों में बंटा हुआ है. बालदास का प्रभाव सतनामी समाज में अधिक माना जाता है. वहीं राजनीतिक दृष्टि से भी बालदास 10 से अधिक विधानसभाओं में सीधे वोट बैंक को प्रभावित करते हैं.
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक है. उसके बाद एससी यानी सतनामी समाज का प्रभाव है. वहीं तीसरे स्थान पर एसटी वर्ग आदिवासी समाज है. राज्य में सतनामी समाज और आदिवासी समाज के वोट बैंक प्रतिशत में भी बड़ा अंतर है. ओबीसी में साहू जाति के लोगों की संख्या ज्यादा है. वोटबैंक आरक्षण के हिसाब से प्रतिशत देखें तो OBC में 47 प्रतिशत, SC में 13 प्रतिशत, ST में 32 प्रतिशत है.
राजनीतिक जानकारों की मानें तो धर्म के आधार पर छत्तीसगढ़ की जनसंख्या में 93. 25 प्रतिशत हिन्दू, 2.02 प्रतिशत मुस्लिम, 1.92 प्रतिशत क्रिश्चियन, 0.27 प्रतिशत सिख, 0.28 प्रतिशत बुद्धिस्ट, 0.24 प्रतिशत जैन निवासरत हैं. जबकि अन्य जाति के 1.94 प्रतिशत लोग छत्तीसगढ़ में हैं.
सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष “
