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दूधाधारी मठ में श्रीराम कथा, मधुसूदनाचार्य बोले- अयोध्या यदि बड़ी अयोध्या है तो रायपुर छोटी अयोध्या

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12 नवंबर 2022 | विद्या दो प्रकार से प्राप्त होती है- गुरु की सेवा और पूर्व जन्म के संस्कार से। जिस वृक्ष में फल लगा होता है, वह स्वयं ही झुक जाता है। इसी तरह जिस व्यक्ति के अंदर विद्या आ जाती है, वह विनम्र हो जाता है। यह बात दूधाधारी मठ में श्रीराम कथा में अयोध्या धाम से आए स्वामी मधुसूदनाचार्य महाराज ने कही।

महाराज ने कहा कि जिस व्यक्ति को हम प्रणाम करते हैं, उसे कुछ भी नहीं मिलता। वह आशीर्वाद देता है, किंतु जो प्रणाम करते हैं, उन्हें आशीर्वाद और पुण्य दोनों की प्राप्ति होती है। प्रणाम हमेशा दोनों हाथों से करना चाहिए। एक हाथ से प्रणाम करने वाला व्यक्ति नरकगामी होता है। संतों को कभी भी अपने लिए किसी तरह की कोई चिंता नहीं होती। वे राष्ट्र के लिए चिंतित होते हैं। श्री रामचरितमानस में लिखा है -गांधि तनय मन चिंता व्यापी। राष्ट्र की सुरक्षा को लेकर विश्वामित्र चिंतित हो गए। उन्होंने सोचा कि यदि राक्षसों का विनाश नहीं हुआ तो धरती रसातल में चली जाएगी, इसलिए उन्होंने राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांगा।

रायपुर नगर की अयोध्या से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या यदि बड़ी अयोध्या है तो रायपुर छोटी अयोध्या। अयोध्या कौशल प्रांत में स्थित है और रायपुर दक्षिण कौशल में। जहां राम हैं, वहीं अयोध्या है। कथा सुनने के लिए दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास, स्वामी ब्रह्म विद्यानंद सरस्वती, विधायक सत्यनारायण शर्मा, छत्तीसगढ़ मत्स्य बोर्ड के अध्यक्ष एमआर निषाद, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश दुबे, प्रयाग राज से संत रामशिरोमणि दास, सच्चिदानंद उपासने, अजय तिवारी, अनिल तिवारी, विजय पाली आदि उपस्थित रहे।

सोर्स :-“नईदुनिया”                                

 


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