दशहरा व गोंचा पर्व पर बस्तर में बनाए जाते हैं चार, आठ व 12 चक्का वाले विशालकाय रथ संचालन की है परंपरा, दशहरा पर आठ व 12 चक्का वाले रथ का संचालन किया जाता है
जगदलपुर दिनांक 15 मार्च 2022 । बस्तर जिले में दशहरा व गोंचा पर्व पर रथ संचालन की परंपरा रही है। करीब छह सौ साल से अधिक समय से यहंा पर इन विशालकाय रथ संचालन की परंपरा आज भी कायम है। रथ संचालन के बाद इन रथों को सिरहासार चौक के पास ही रख दिया जाता है।
पांच टन से अधिक लकडिय़ों का होता है उपयोग
यहां गोंचा पर्व पर एक चार चक्का वाले रथ तथा दशहरा पर आठ व १२ चक्का वाले रथ का संचालन किया जाता है। करीब बीस फीट ऊंचा व पच्चीस फीट लंबाई वाले पूरी तरह से भारी भरकम इमारती लकडिय़ों से निर्मित इन रथ का वजन तीन से पांच टन तक का होता है।
वनवासियों का हुजुम उमड़ पड़ता है
दशहरा व गोंचा पर्व पर बस्तर में बनाए जाते हैं विशालकाय रथxदशहरा व गोंचा पर्व के बाद इन रथों को सिरहासार चौक के पास सुरक्षित रख दिया जाता है। इन्हें आगामी पर्व में फिर से सुधारकर उपयोग में लाया जाता है। परिक्रमा के दौरान इन रथों को खींचने के लिए तीन सौ से चार सौ वनवासियों का हुजुम उमड़ पड़ता है।
भोपाल, रायपुर व सेंट्रल जेल भेजा गया
इन दशहरा के रथ का संचालन के बाद इन्हें सुरक्षित रख दिया जाता है। कभी कभार इन रथों की दशा कमजोर हो जाती है तो इनकी लकडिय़ों को अन्य उपयोग के लिए नीलाम कर दिया जाता है। ये रथ भारत भवन भोपाल व रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन भी भेजे गए हैं। इसके अलावा इन्हें सेंट्रल जेल भी भिजवाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इनसे कीमती फर्नीचर व वुडन आर्ट बनाए जाएंगे।
Source :- पत्रिका
