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देश में पहली बार गोबर का ऐसा उपयोग: कोयला नहीं अब गोबर से गर्म हो रही सीमेंट प्लांट की भठ्ठी

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22 मार्च 2023 |  सीमेंट प्लांट की भठ्ठी (क्लिन) को गर्म करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए पहली बार कोयले के साथ गोबर का उपयोग किया जा रहा है। बलौदाबाजार-भाटापारा स्थित श्री सीमेंट प्लांट में जिला प्रशासन के सहयोग से यह प्रयोग शुरू हो चुका है। यहां छह महीने के भीतर अब तक 38 टन गोबर की खपत हो चुकी है। सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में भठ्ठी को गर्म करने के लिए गोबर के उपयोग का यह प्रयोग प्रदेश में पहली बार किया जा रहा है |

सीमेंट प्लांट में छह महीने के प्रयोग के बाद हुआ एमओयू
इस नवाचार को बढ़ावा देने के लिए श्री सीमेंट प्लांट और बलौदाबाजार जिला प्रशासन के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी में मंगलवार को एमओयू किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे किसानों की समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए अभिनव पहल बताया है।
एडिशनल फ्यूल रिर्सोसेज के रूप में देश में पहली बार गोबर का उपयोग
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा में स्थापित श्री सीमेंट उद्योग ने गोबर की आपूर्ति के लिए स्थानीय गोठान समितियों से करार किया है। इस पहल से पशुपालकों को हर महीने चार से पांच हजार रुपये की आय हो रही है। एमओयू के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, बलौदाबाजार कलेक्टर रजत बंसल, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, श्री सीमेंट के रवि तिवारी उपस्थित थे।
प्लांट को रोजाना 50 टन की जरूरतश्री सीमेंट के अधिकारियों ने बताया कि पूर्णत: गोबर से सीमेंट प्लांट की भट्ठी को गर्म करने के लिए रोजाना कम से कम 50 टन गोबर की जरूरत होगी। वर्तमान में छह से 10 टन गोबर ही उपलब्ध हो रहा है इसलिए गोबर के साथ कोयला भी मिलाया जा रहा है। एडिशनल फ्यूल रिर्सोसेज के रूप में गोबर को मिलाया जा रहा है।

95 गांवों के पशुपालकों को होगा फायदा
अधिकारियों ने बताया कि जिले में सात गौशाला में 1739 पशु हैं। चार गौश्ााला सिमगा विकासखंड में ही स्थित हैं। सीमेंट प्लांट के आस-पास 95 गांव हैं, जहां लगभग 80 हजार पशु हैं। फैक्ट्री की मांग के अनुरूप गोबर उपलब्ध कराने का प्रयास किए जा रहा है। वर्तमान में 15 किमी की परिधि में स्थित 16 गांवों से प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन गोबर प्रदान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने किया ट्वीट
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट किया कि-नवाचारों का गढ़ है छत्तीसगढ़… किसानों की समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए औद्योगिक नगरी बलौदाबाजार में की जा रही है अभिनव पहल। पहली बार सीमेंट उद्योग के लिए की जा रही गोबर की खरीदी। सीमेंट फैक्ट्री में क्लिन को गर्म करने कोयले के स्थान पर अब होगा गोबर का उपयोग।
ऐसे बनता है सीमेंट-
लाइम स्टोन के छोटे-छोटे टुकड़ों को भट्ठी में डालकर 1400 डिग्री में गलाया जाता है। गर्म होने के बाद लाइम स्टोन पाउडर बन जाता है जिसे क्लिंकर कहते हैं। इसमें जिप्सम, फ्लाईएश मिलाकर सीमेंट बनाया जाता है।
हाइलाइटर
1. गोधन न्याय योजना से वर्तमान में 3.50 लाख ग्रामीण पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं।
2. गोठान समितियों के माध्यम से गोबर से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया जारी है।
3. इससे पहले गोबर से पेंट बनाने का नवाचार किया जा चुका है।
4. गोठानों में गौमूत्र की खरीदी और औषधीय प्रयोजन किया जा रहा है।

सोर्स :-“नईदुनिया”     


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