सबसे बड़ा लोकतंत्र. 140 करोड़ आबादी. चौथी मजबूत सेना, ब्रिलियंट अफसर, अनगिनत संसाधन. जागरूक लोगों की निगरानी, बेहतरीन सिविल डिफेंस और हाईटेक पुलिस. इसके बावजूद अगर भारत में बलात्कार (Rape) जैसे घृणिति अपराध हो रहे हैं, तो ये सिस्टम की नाकामी है. अगर आप के घर में भी कोई बच्ची है, तो असम गैंगरेप पीड़िता का कहानी आपको रुला देगी.
असम में 15 साल की एक लड़की ट्यूशन पढ़कर घर लौट रही थी. वो होनहार बच्ची पुलिस अफसर बनना चाहती थी. इसलिए पढ़ाई का नागा नहीं करती थी. अपने मोहल्ले तक पहुंच गई थी. अचानक कुछ दरिदें आते हैं उसे अगवा करके अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं. वो चीखी, मदद के लिए चिल्लाई लेकिन उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया. दरिदों की आंखों में हवस भरी थी. उन्होंने पीड़ित की एक न सुनी. बलात्कारी उसे जिंदगी भर का सदमा देकर कब्रिस्तान के पास छोड़कर फरार हो गए. गैंगरेप का एक आरोपी अपने गुनाह की कानूनी सजा पूरी किए बगैर नदी में डूब के मर गया. अब उसी पीड़िता की एक कहानी लोगों को रुला रही है. ये वो बात है, जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा फट जाएगा.
चाची ये रेप क्या होता है?
पीड़िता सदमें में है. परिवार रो रहा है. ITNE की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता की चाची ने बताया है कि इस बुरे हादसे से दो दिन पहले ही नाबालिग मासूम ने अपनी चाची से पूछा था – ‘चाची जी ये रेप क्या होता है?’ ये बताते हुए उनकी आंखे छलछला उठीं. दरअसल उसे कुछ दिन पहले कोलकाता में डॉक्टर से रेप-मर्डर केस के बारे में पता चला था. इसलिए उसने ये सवाल पूछा था.
पीड़ित परिजन ने रोते हुए उस दिन की बात को याद करते हुए कहा, ‘उन्हें अफसोस है कि वो उस दिन उसके साथ क्यों नहीं थीं. अपराधियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए. ताकि भविष्य में कोई दरिंदा किसी बेटी के साथ हैवानियत न कर सके.’
SOURCE – ZEE NEWS HINDI
