• June 8, 2026 7:17 pm

दिमाग चोरी करके 240 टुकड़े किए गए… सदी के सबसे इंटेलिजेंट वैज्ञानिक के साथ ऐसा क्यों हुआ?

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Albert Einstein Birth Anniversary: भौतिक विज्ञान के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन की मौत के बाद परिवार को बताए बिना उनका दिमाग चोरी कर लिया गया था. हद तो यह कि उनके दिमाग के 240 टुकड़े करके वैज्ञानिकों को रिसर्च के लिए भेज दिया गया था. अलबर्ट आइंस्टीन की पुण्यतिथि पर आइए जान लेते हैं पूरा किस्सा.

दुनिया को ऊर्जा का फॉर्मूला देने वाले सदी के सबसे इंटेलिजेंट वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि एनर्जी और कुछ नहीं, बल्कि द्रव्यमान और उसकी स्पीड का ही बदला हुआ रूप है. भौतिक विज्ञान के इस महान वैज्ञानिक की मौत के बाद परिवार को बताए बिना उनका दिमाग चोरी कर लिया गया था. हद तो यह कि उनके दिमाग के 240 टुकड़े करके वैज्ञानिकों को रिसर्च के लिए भेज दिया गया था. अलबर्ट आइंस्टीन की पुण्यतिथि पर आइए जान लेते हैं पूरा किस्सा.

9 नवंबर 1921 को नोबेल पुरस्कार से नवाजे गए आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के वुर्टेमबर्ग में उल्म नामक जगह पर हुआ था. उनके माता-पिता धर्मनिरपेक्ष यहूदी थे. महज पांच साल की उम्र में पहली बार कम्पास देखा तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ था. इससे उनके मन में ब्रह्मांड की अदृश्य शक्तियों के बारे में आकर्षण पैदा हुआ था.

पहली बार 12 साल की उम्र में ज्यामिति की किताब को देखा और प्यार से उसे पवित्र छोटी ज्यामिति पुस्तक कहने लगे. इसके बावजूद मध्यमवर्गीय आइंस्टीन को युवावस्था में कोई लक्ष्य नहीं दिख रहा था पर 1915 में सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत विकसित कर लिया. इसके छह साल बाद ही 1921 में उन्हें भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

बेटे ने किया था दावा, शरीर से दिमाग गायब

आइंस्टीन की मौत के बाद न्यू जर्सी के ट्रेंटन में उनको दफन कर दिया गया. हालांकि, इसके अगले ही दिन उनके बेटे हांस अल्बर्ट ने दावा किया था कि ताबूत में रखा आइंस्टीन का शरीर पूरा नहीं था. इस बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने फ्रंट पेज पर एक आर्टिकल प्रकाशित किया था, इसमें दावा किया था कि थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी और न्यूक्लीयर फिजन के विकास को संभव बनाने वाले आइंस्टीन के दिमाग को स्टडी के लिए निकाल लिया गया था. उनका पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर डॉ. थॉमस हार्वे ने आइंस्टीन की परिवार की मंजूरी के बिना ही उनका दिमाग निकाला था.

इसलिए पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने निकाला था दिमाग

तब डॉ. हार्वे का कहना था कि दुनिया के इस सबसे प्रतिभाशाली इंसान के दिमाग की स्टडी करना बेहद जरूरी है. वैसे तो आइंस्टीन ने मना किया था कि मौत के बाद उनके शरीर का किसी भी तरह का परीक्षण न किया जाए, इसके बावजूद उनके बेटे हांस ने डॉ. थॉमस हार्वे को अनुमति दे दी थी कि उनके दिमाग की स्टडी की जाए. हांस का कहना था कि डॉ. हार्वे दुनिया की भलाई के लिए काम कर रहे हैं.

रिसर्च के लिए भेजे गए थे दिमाग के टुकड़े

तब डॉ. हार्वे ने आइंस्टीन के दिमाग की दर्जनों तस्वीरें खींची थीं. इसके बाद उनके दिमाग को 240 टुकड़ों में काटकर कुछ और वैज्ञानिकों को रिसर्च के लिए भेजा था. बताया जाता है कि डॉ. हार्वे ने आइंस्टीन के दिमाग का हिस्सा एक साइडर बॉक्स में रिसर्च के लिए दूसरे वैज्ञानिकों तक पहुंचाया था. साल 1985 में डॉ. हार्वे ने 1985 आइंस्टीन के दिमाग पर एक पेपर प्रकाशित किया था. इसमें उन्होंने लिखा था कि यह दिमाग किसी एवरेज दिमाग से अलग ही दिखता है. इसीलिए यह अलग से तरह से काम करता है.

90 के दशक में डॉ. हार्वे ने आइंस्टीन की पोती को उनके दिमाग का एक हिस्सा गिफ्ट करने की कोशिश की पर उसने इसे लेने से इनकार कर दिया था. फिलहाल आइंस्टीन के दिमाग को फिलाडेल्फिया के म्यूटर म्यूजियम में रखा गया है. इसे खास जार में केमिकल से संरक्षित किया गया है.

 


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