• June 7, 2026 6:54 pm

डल झील सिकुड़ने का दावा गलत, NASA की तस्वीर तीन साल पुरानी, जानिए एक्सपर्ट की राय

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14 जून 2023 ! कश्मीर घाटी की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली डल लेक और वूलर झील के सिकुड़ने का दावा गलत है.  की ओर किए जाने इस दावे को पर्यावरण विश्लेषकों ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. एक्सपर्ट का कहना है कि NASA ने तीन साल पुरानी तस्वीर के आधार पर ये दावा किया है, जबकि इन तीन सालों में स्थिति सुधरी है, एक्सपर्ट का ये भी दावा है कि सैटेलाइट से झीलों की वास्तविक स्थिति का पता ही नहीं लगाया जा सकता.

NASA ने कश्मीर घाटी की सैटेलाइट इमेज जारी कर श्रीनगर की डल और बांदीपोरा की वूलर झील सिकुड़ने का दावा किया था. इसके लिए NASA ने जिस तस्वीर का उदाहरण दिया था वो स्पेस एजेंसी के ऑपरेशन लैंड इमेजर ने लैंडसेट 8 से 2020 में 23 जून को ली थी. इन्हीं तस्वीरों के आधार पर ये दावा किया जा रहा है कि इन झीलों से पानी कम हो रहा है.

श्रीनगर में पर्यावरण विश्लेषक एजाज रसूल के मुताबिक NASA ने तीन साल पुरानी तस्वीर जारी की है, ये सैटेलाइट इमेज हैं. उनका दावा है कि इन झीलों के आसपास हरियाली इतनी ज्यादा है कि सैटेलाइट इमेज से इन झीलों के क्षेत्रों का पता ही नहीं लगाया जा सकता. उन्होंने ये भी दावा किया कि पिछले दो वर्षों में कश्मीर घाटी में सरकार की ओर से ऐसे कई प्रयास किए गए जिनसे झीलों की स्थिति बेहतर हुई है. वर्तमान में ड्रेजिंग के साथ-साथ अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं.

पर्यावरण विश्लेषक एजाज के मुताबिक झील के हिस्सों में कई जगह घास उग आती हैं, सैटेलाइट इमेज में ये घास जमीन की तरह दिखाई देती है. ऐसा हो सकता है इसी वजह से NASA को ये लग रहा हो कि झील सिकुड़ रही है, जबकि वास्तविकता में ऐसा बिल्कुल नहीं है. वास्तव में डल और वूलर झील जैसी थीं, वैसी ही हैं.

नासा की ओर से जो तस्वीर जारी की गई है, उसमें नीचे की ओर दाहिनी तरफ डल झील नजर आ रही है, इसमें बताया गया है कि कैसे 16 वीं और 17 वीं शताब्दी में मुगल शासकों द्वारा डिजाइन बगीचों के बीच स्थित डल झील दम तोड़ रही है. इसमें बायीं तरफ ऊपर की ओर वूलर झील नजर आ रही है जो एशिया की सबसे बड़ी झीलों में से एक है. NASA की ओर से दावा किया जा रहा है कि यह झील भी सिकुड़ती जा रही है.

विश्व भर में झीलों के सिकुड़ने पर शोध भी हो चुका है, उस रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर की 53 प्रतिशत झीलों और जलाशयों में पानी कम हुआ है, हालांकि इस रिसर्च में कश्मीर की डल और वूलर झील का नाम शामिल नहीं है. एक महीने पहले जर्नल साइंस में प्रकाशित रिसर्च में झीलों में पानी कम होने पर सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर संकट जताया गया था.

रिसर्च में 1992 से लेकर 2020 तक दुनिया भर की झीलों की उपग्रह से ली गई तस्वीरों का आकलन किया गया. रिसर्च के सामने आया कि ये झीलें हर साल 32 गीगा टन पानी खो रही हैं. रिसर्च में इसका कारण जलवायु परिवर्तन और इंसानों द्वारा किया जा रहा दोहन बताया गया था. इस रिसर्च में भारत की भी 30 से ज्यादा झीलें शामिल की गईं थीं.

सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    


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