दिनांक 24 मई 2022|वाराणसी के मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर आज जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत अपना आदेश सुनाएगी। अदालत को दो मामलों की सुनवाई का क्रम तय करना है। पहला, प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के उस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करे, जिसमें कहा गया है कि यह मुकदमा सुनने योग्य ही नहीं है।
दूसरा, वादिनी महिलाओं की ओर से मां शृंगार गौरी प्रकरण के सर्वे के संबंध में आपत्तियों की सुनवाई शुरू करे। वाराणसी के जिला जज की अदालत आज आदेश देगी कि मुस्लिम पक्ष द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद पर दावा करने वाले हिंदू पक्ष के दीवानी मुकदमे को खारिज करे या एडवोकेट कमिश्नर की सर्वेक्षण रिपोर्ट को भी इसके साथ लिया जाए।
ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई को देखते हुए वाराणसी के दीवानी कचहरी परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे हैं। कचहरी परिसर में वादकारियों, अधिवक्ताओं और उनके सहायकों, न्यायिक सेवा से जुड़े कर्मियों-अफसरों और दुकानों के संचालकों के अलावा अन्य किसी के अनावश्यक प्रवेश पर सख्ती के साथ रोक लगाई गई है।
मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण की वादिनी महिलाओं के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने कल अपनी दलीलें पेश की थीं। उन्होंने कहा कि मामला पूजा स्थल अधिनियम के मापदंडों को पूरा नहीं करता है। वह चाहते थे कि मामला खारिज हो जाए, लेकिन हमने भी कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश की थीं। मामले को यूं ही खारिज नहीं किया जा सकता, यह चलता रहेगा। यह संपत्ति का नहीं बल्कि पूजा के अधिकार का मामला है। कोर्ट इस मामले पर आज दोपहर 2 बजे सुनवाई करेगी। फैसला संभवत: शाम 4 बजे तक आएगा।
हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि ज्ञानवापी परिसर विवाद में पक्षकार बनने के लिए हमने बनारस जिला न्यायालय में आवेदन दायर किया है। चल रही दलील के अलावा हम ज्ञानवापी मंदिर स्थल को पूजा के उद्देश्य से हिंदुओं को पूर्ण रूप से सौंपने की अपील करते हैं। मामले पर आज दोपहर 2 बजे सुनवाई होनी है। काशी को हमेशा से महादेव की नगरी के रूप में जाना जाता रहा है, इसलिए हमारी मांग है कि मस्जिद को सौहार्दपूर्ण तरीके से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
ज्ञानवापी परिसर पूरी तरह से शिव परिवार को समर्पित होना चाहिए। हम अपने सभी भारतीय मुस्लिम भाइयों-बहनों से गंगा-जमुनी तहजीब के तहत शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए एक कदम आगे बढ़ने की अपील करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 23 मई यानी सोमवार से मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई जिला जज की अदालत में शुरू हुई है। 23 मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने कोर्ट में कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि यह मुकदमा सुनवाई योग्य है या नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘अदालत में यह मुकदमा दाखिल होने के बाद ही हमारी ओर से प्रार्थना पत्र देकर कहा गया था कि यह सुनने योग्य नहीं है। हमारे प्रार्थना पत्र पर सुनवाई नहीं हुई और सर्वे का आदेश दे दिया गया। ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई करना उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन है’।
सर्वे रिपोर्ट पर भी कार्रवाई करे कोर्ट
वादिनी पांच महिलाओं की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत के आदेश से ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हुआ। सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट अब कोर्ट का रिकॉर्ड है। सर्वे रिपोर्ट को भी दूसरे पक्ष के प्रार्थना पत्र के साथ ही पढ़ा जाए। सर्वे रिपोर्ट से संबंधित वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी हमें उपलब्ध कराई जाए। उस पर सुनवाई करते हुए आपत्ति मांगी जानी चाहिए। ज्ञानवापी प्रकरण उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के तहत नहीं आता है।
दो अन्य प्रार्थना पत्र भी हुए हैं दाखिल
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने भी जिला जज की अदालत में सोमवार को याचिका दाखिल की थी। पूर्व महंत के अनुसार, ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की पूजा का अधिकार उन्हें दिया जाए। उनके पूर्वज अकबर के शासनकाल के समय से विश्वनाथ मंदिर में पूजा-पाठ का काम कर रहे हैं। अदालत ने पूर्व महंत की याचिका पर मंगलवार तक के लिए सुनवाई टाल दी थी।
वहीं, फौजदारी के अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी सहित सात नामजद और 200 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156-3 के तहत स्पेशल CJM की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है। अदालत इस प्रार्थना पत्र पर आज सुनवाई करेगी।
8 हफ्ते में पूरी करनी है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने बीती 20 मई को ज्ञानवापी केस को वाराणसी के जिला जज की कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने 51 मिनट चली सुनवाई में साफ शब्दों में कहा था कि मामला हमारे पास जरूर है, लेकिन पहले इसे वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में सुना जाए। कोर्ट ने कहा था कि जिला जज 8 हफ्ते में अपनी सुनवाई पूरी करेंगे। तब तक 17 मई की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देश जारी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 21 मई को सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से ज्ञानवापी प्रकरण से संबंधित पत्रावली जिला जज की कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई थी। बता दें कि 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में तीन बड़ी बातें कही थीं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि शिवलिंग के दावे वाली जगह को सुरक्षित किया जाए। मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से न रोका जाए। सिर्फ 20 लोगों के नमाज पढ़ने वाला ऑर्डर अब लागू नहीं। यानी ये तीनों निर्देश अगले 8 हफ्तों तक लागू रहेंगे। इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा।\
Source; दैनिक भास्कर
