9 मई 2023 ! आगरा के मलपुरा कस्बे के गांव कबूलपुर में रविवार को मकान निर्माण के लिए हो रही खुदाई के दौरान प्राचीन प्रतिमा निकली थी। रविवार को पुरातत्व विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने मूर्ति की प्राचीनता की जांच की। टीम के सदस्यों नीरज कुमार वर्मा, नरेंद्र सिंह राणा व जितेंद्र सिंह ने बताया कि उमा-महेश्वर यानी महादेव-पार्वती की मूर्ति है, जो 18वीं सदी की है।
उन्होंने बताया कि मूर्ति लंबे समय तक पानी में पड़ी रही, इस वजह से क्षरित हो गई है। मूर्ति बफ स्टोन से बनी है जो राजस्थान में मिलता है। ग्रामीणों में चर्चा है कि यहां से थोड़ी दूर एक वाणगंगा नदी हुआ करती थी, जो अब अस्तित्व में नहीं है। यह नदी में पड़ी रही होगी। ग्रामीणों का कहना है कि जहां मूर्ति निकली है, वहां मंदिर बनवाया जाएगा।
कबूलपुर गांव निवासी भगवान दास के खेत पर मकान का निर्माण कार्य चल रहा है। रविवार की शाम करीब छह बजे बुल्डोजर से खोदाई हो रही थी, तभी एक पत्थर का टुकड़ा बुल्डोजर से टकरा गया। वहां खड़े भगवान दास और परिवार के अन्य लोगों ने पत्थर को निकाला तो यह एक पत्थर की प्राचीन प्रतिमा थी। जिसकी जानकारी गांव के अन्य लोगों को हुई तो धीरे-धीरे भीड़ जुट गई।
भगवान सिंह के खेत में बन रहे घर पर लोग पहुंच गए। प्रतिमा के पास ग्रामीणों ने भजन कीर्तन शुरू कर दिया। आरती की। देर रात तक गांव में प्रतिमा कौतुहल का विषय बनी रही।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल का कहना है कि प्रथम द्ष्टया प्रतिमा शिव-पार्वती की है। प्रतिमा का काफी क्षरण हो चुका है। आकृतियां स्पष्ट नहीं दिख रही। उत्खनन टीम को गांव में भेजकर प्रतिमा की जांच कराई गई है।
सोर्स :-“अमर उजाला “
