भारतीय मूल के अधिकारी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी और प्रभावशाली कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं. अमेरिका में बहुत कम संख्या में होने के बाद भी भारतीय मूल के अमेरिकी वहां की अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं.
अमेरिका की कुल आबादी में भारतीय-अमेरिकियों की संख्या भले ही छोटी-सी हो, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव बहुत बड़ा है. बड़ी कंपनियों को लीड करने से लेकर स्टार्टअप में इनोवेशन, भारी-भरकम टैक्स देने, और कंजप्शन व निवेश के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने तक भारतीय-अमेरिकियों का योगदान हर क्षेत्र में दिखाई देता है. हालांकि इसका फायदा भारत को भी मिलता है. कैसे? चलिए जानते हैं.
भारतीय मूल के अधिकारी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी और प्रभावशाली कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं. गूगल के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला और एडोब के शांतनु नारायण जैसी हस्तियां ऐसी कंपनियों के टॉप पर हैं, जो सालाना एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का रेवेन्यू पैदा करती हैं और लाखों अमेरिकियों को रोजगार देती हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था की जटिलताओं के बीच इन कंपनियों का सफलतापूर्वक नेतृत्व करना और निरंतर विकास और नवाचार सुनिश्चित करना इन नेताओं की अहम भूमिका है.
भारतीय मूल के लोग संभाल रहे बड़ी जिम्मेदारियां
– सुंदर पिचाई: गूगल के सीईओ
– सत्य नडेला: माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ
– शांतनु नारायण: एडोब के सीईओ
– रवि कुमार: कॉग्निजेंट के सीईओ
– लेखा नायर: आईबीएम के पूर्व सीईओ
– इंदिरा नूयी: पेप्सिको के पूर्व सीईओ
– राजीव सुरी: इनट्यूइट के सीईओ
– अजयपाल सिंह बंगा: वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष
– जय चौधरी: ज़स्केलर के सीईओ
