• June 9, 2026 1:04 am

इंसानों के ‘अमर’ बना देंगे उनके क्लोन, कभी नहीं आएगा ‘बुढ़ापा’… लैब टेस्ट में पास हो चुके हैं जानवर

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09 फ़रवरी 2023 | कई अध्ययन और बड़े पैमाने पर रिसर्च के बाद भी वैज्ञानिकों के लिए ‘अमरता‘ एक सपना बनी हुई है। लेकिन एक एंटी-एजिंग शोधकर्ता का मानना है कि हम ‘वहां तक पहुंच सकते हैं’ या कम से कम मानव जीवन को मौजूदा सीमाओं से आगे बढ़ा सकते हैं, वह भी बिना किसी चमत्कारिक गोली या इंजेक्शन की मदद से। बायोटेक कंपनी इंसिलिको मेडिसिन के प्रमुख डॉ. एलेक्स झावोरोंकोव का कहना है कि ह्यमन क्लोन यानी इंसानों के क्लोन ‘अनंत जीवन’ में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

थ्योरी कहती है कि लैब में शारीरिक अंगों के निर्माण का साइंटिफिक कॉन्सेप्ट लोगों को ‘अतिरिक्त’ अंदरूनी अंग प्रदान करेगा, जब इंसान बीमार होगा या मौत के करीब होगा। जानवरों के क्लोन पहले ही वैज्ञानिक प्रयोगों के हिस्से के रूप में लैब में तैयार किए जा चुके हैं। वहीं पौधे हजारों साल से इसी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। अमरता की तलाश में जुटे शिक्षाविदों को लगता है कि इंसानों में भी यह उपलब्धि संभव है।

क्लोन देगा नया जीवन

उम्र संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए दवाएं बनाने वाली हांगकांग स्थित फर्म के डॉ झावोरोंकोव का मानना है कि यह तकनीक आज के बच्चों के जीवनकाल में इंसानों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। यह इंसानों को अस्वस्थ होने पर ‘अतिरिक्त’ अंदरूनी अंग प्रदान करेगी, जैसे हृदय, लीवर या फेफड़े। इन अंगों को क्लोन से निकालकर इंसानों के शरीर में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। झावोरोंकोव का मानना है कि आगे चलकर यह एक कार या आईफोन की तरह ही सुलभ हो जाएगा।

क्यों विवादित है ह्यूमन क्लोन का आइडिया?

हालांकि मानव क्लोन का आइडिया वैज्ञानिक कठिनाइयों के कारण बेहद विवादास्पद है। जानवरों के क्लोन में उच्च मृत्यु दर और शारीरिक विकृति देखी गई है। मानव को आनुवांशिक रूप से किसी अन्य व्यक्ति, जो वर्तमान में मौजूद हो या पहले कभी रहा हो, के समान बनाने को लेकर कुछ नैतिक चिंताएं भी हैं। यूएस नेशनल ह्यूमन जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पहचान के सिद्धांतों का उल्लंघन कर सकता है।

सोर्स :- “नवभारतटाइम्स”                    

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