25 जुलाई 2023 ! इतिहास में ये पहली बार है कि भारत ने मिसाइलों से लैस युद्धपोत किसी दूसरे देश को दिया हो.
वियतनाम के कैम रान्ह में एक समारोह में हस्तान्तरण की प्रक्रिया को नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की अगुआई में पूरा किया गया.
जानकार इसे दिल्ली और वियतनाम के बीच साझेदारी बेहतर होने का सबूत बता रहे हैं.
कार्यक्रम के दौरान भारत और वियतनाम के बीच सामरिक साझेदारी की अहमियत पर बात करते हुए, नेवी चीफ़ एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि ये क्षण ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि पहली बार एक पूरी तरह ऑपरेशनल जंगी जहाज किसी मित्र देश को दिया गया है.
उन्होंने कहा, “भारतीय नौसेना के सबसे बेहतरीन और सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले युद्धपोतों में से एक कृपाण को सम्मानित वियतनाम पीपुल्स नेवी को सौंपने के समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है.”
आईएनएस कृपाण भारत में बना युद्धपोत है जिससे मिसाइलें दागी जा सकती हैं.
इसे 1991 में नौसेना में शामिल किया गया था और नौसेना की ईस्टर्न फ़्लीट का ये एक अहम हिस्सा रहा है.
32 साल की सेवा के बाद इसे डिकमिशन किया गया और वियतनामी सेना को हथियारों के साथ दिया गया है.
इसमें 12 अधिकारी समेत100 नौसैनिक काम करते थे. ये करीब 90 मीटर लंबा और 10.45 मीटर चौड़ा है. सभी चीज़ों से लैस होने पर इसका वज़न 1450 टन हो जाता है.
जेएनयू में प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, “चीन और वियतनाम के बीच अपनी भूमि और समुद्री सीमा, दोनों को लेकर विवाद रह चुका है. समुद्री सीमा अभी भी विवादित है.”
उनका कहना है कि वियतनाम को भारत के साथ रक्षा सहयोग से लगातार फ़ायदा होता रहा है.
वो कहते हैं, “यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति के साथ-साथ क्वाड प्लस देशों के साथ संबंध बेहतर करने की भारत की कोशिश का भी हिस्सा है जिसमें न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम शामिल हैं.”
” भारत और वियतनाम दोनों के अपने पड़ोसी देश चीन के साथ जटिल समीकरण हैं और सैन्य साझेदारी को चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी संप्रभुता के दावों के ख़िलाफ उठाया कदम मानता है.”
विदेश मामलों के जानकार रॉबिन्दर सचदेवा का भी मानना है, “युद्धपोत देना दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक बड़ा कदम है क्योंकि चीन से दोनों देशों के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं है. दक्षिण चीन सागर में दोनों देशों का हित जुड़ा है, इसलिए इसे चीन से जोड़कर देखना गलत नहीं होगा.”
हालांकि भारत ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि भारत-वियतनाम रक्षा सहयोग भारत की एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है और इसका भारत की चीन नीति से कोई लेना-देना नहीं है.
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
