21 दिसंबर 2023 ! हमारे देश में जैसे महिलाओं को कुछ मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं है, उसी तरह ऐसे भी कुछ मंदिर हैं, जहां पुरुषों को प्रवेश नहीं करने दिया जाता है या फिर किसी खास वक्त पर उनके लिए मंदिर के द्वार खुलते हैं. हमारे देश में ऐसे कई मंदिर या धार्मिक स्थल हैं जहां महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं होती है. हालांकि पिछले कुछ सालों से उठ रही विरोध की आवाज़ और हाईकोर्ट ने भी महिलाओं को उनका हक दिलाया है. हाजी अली दरगाह, शनि शिंगणापुर और सबरीमाला जैसी धार्मिक जगह वजहों से चर्चा में रही थी. लेकिन आपको यह बात जानकर हैरानी होगी की भारत में ऐसे भी मंदिर हैं जहां पुरुषों की एंट्री बैन है.कामाख्या मंदिर असम के गुवाहटी में स्थित है और यह मेला स्थल पर बना हुआ है. माना जाता है कि सभी शक्तिपीठों में कामाख्या शक्तिपीठ का स्थान सबसे ऊपर है. माता के महावारी के दिनों में यहां उत्सव मनाया जाता है. इन दिनों पुरुषों की एंट्री बिल्कुल बैन होती है और यहां के पुजारी भी इस दौरान एक महिला होती है. कामाख्या मंदिर में यहां आने वाले सभी भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण करती हैं. भक्तजन अपनी इच्छा पूर्ण करने के लिए यहां कन्या पूजन करते हैं, पशुओं की बलि देते हैं और भंडारा भी लगाते हैं. इस मंदिर में मादा पशुओं की बलि नहीं दी जाती है. कामाख्या मंदिर का एक रहस्य एक यह भी है कि कामाख्या माता तांत्रिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण देवी मानी जाती है.
यह मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है. ब्रह्मा भगवान का मंदिर पूरे भारत में सिर्फ यहीं देखने के लिए मिलता है. इस मंदिर को 14वीं शताब्दी में बनाया गया था जहां पुरुषों का आना बिल्कुल मना है. ऐसा माना जाता है कि देवी सरस्वती के श्राप की वजह से यहां कोई भी शादीशुदा पुरुष नहीं जा सकता है. इसलिए इस मंदिर के दर्शन पुरुषों को आंगन से ही करने पड़ते है और शादीशुदा महिलाएं अंदर जाकर पूजन कर सकती हैं.
इस मंदिर में मां भगवती की पूजा की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए यहां महिलाएं तपस्या करने के लिए आती हैं. भगवति माता को संन्यास की देवी भी कहा जाता है. इस मंदिर में केवल संन्यासी पुरुष ही मां के दर्शन कर सकते हैं. साथ ही पुरुषों को भी इस मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है. इस मंदिर परिसर में पूजा करने के लिए केवल स्त्रियां ही आती हैं. स्त्रियों के अलावा इस मंदिर प्रांगण में पूजा आदि के लिए किन्नरों भी आजादी प्राप्त है. इस मंदिर से संबंधित सबसे खास बात तो यह है कि यहां अगर पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करना हो तो उन्हें, महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना करना पड़ता है.
केरल के इस मंदिर का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड है कि यहां एक साथ 30 लाख से भी अधिक महिलाएं पोंगल उत्सव में भाग लेने आई थीं. इस मंदिर में यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस मंदिर में विशेष रूप से भद्रकाली की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि भद्रकाली माता उम्र के दौरान 10 मिनट तक निवास करती हैं जिस दौरान पुरुषों का आना मना होता है.
सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष “
