त्रिपुंड तिलक यदि भगवान शिव के मंत्रो का जाप करने, स्तोत्र का पाठ करने या भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से पहले लगाया जाता है तो व्यक्ति को बहुत से लाभ प्राप्त होते हैं.

हरिद्वार. धार्मिक ग्रंथो के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव के निमित्त पूजा पाठ, व्रत आदि करने का विशेष महत्व है. सावन में जहां शिव भक्त अपनी मनोकामनाओं के लिए शिव के निमित्त कावड़ उठाकर यात्रा करते हैं, तो कुछ शिवभक्त भगवान शिव के मंत्रो का जाप, स्तोत्र का पाठ और व्रत आदि करते हैं. ऐसे ही सावन में ‘त्रिपुंड तिलक’ लगाने से विशेष फलों की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है. कहा जाता है कि भगवान शिव की पूजा अर्चना, उनके मंत्रो का जाप और स्तोत्र का पाठ करने से पहले यदि व्यक्ति स्नान ध्यान करके त्रिपुंड तिलक लगता है, तो उसे भगवान शिव के साथ अन्य देवी देवताओं का आशीर्वाद भी प्राप्त होता हैं. धार्मिक ग्रंथो के अनुसार त्रिपुंड तिलक शरीर के बहुत से भागों पर लगाने का विधान है. इस तिलक को लगाकर भगवान शिव की भक्ति करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और सभी रोगों से छुटकारा ओर शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो जाती है.
त्रिपुंड तिलक लगाने के महत्व को जानने के लिए हमने हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री से बातचीत की. पंडित श्रीधर शास्त्री ने लोकल 18 को बताया कि ‘त्रिपुंड तिलक’ में भगवान शिव के साथ 27 देवताओं का निवास होता है. त्रिपुंड तिलक यदि भगवान शिव के मंत्रो का जाप करने, स्तोत्र का पाठ करने या भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से पहले लगाया जाता है, तो व्यक्ति को बहुत से लाभ प्राप्त होते हैं.
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि भगवान शिव भी त्रिपुंड तिलक लगाते हैं. त्रिपुंड तिलक में तीन रेखाएं होती हैं जिसकी प्रत्येक रेखा में 9 देवताओं का वास होता है. ऐसे ही संपूर्ण त्रिपुंड तिलक में 27 देवताओं का वास होने के कारण व्यक्ति को भगवान शिव के साथ उनका भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. त्रिपुंड तिलक लगाने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक और भक्ति भाव बना रहता है. क्योंकि त्रिपुंड तिलक में आध्यात्मिक शक्तियों का संचार होता रहता है. वह बताते हैं कि शिव महापुराण के अनुसार त्रिपुंड तिलक को शरीर के 32 अलग-अलग भागों में लगाने का विधान है. सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करने से पहले यदि त्रिपुंड तिलक लगाया जाता है, तो उसका व्यक्ति को कई लाख गुना शुभ फल प्राप्त होता है. संपूर्ण त्रिपुंड तिलक का महत्व शिव महापुराण में लिखा हुआ है.
SOURCE – NEWS 18 HINDI
