02 मई 2022 | जब सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करता है तो इस घटना को सूर्य की मिथुन संक्रांति कहते है। सूर्य फिलहाल वृषभ राशि में गोचर कर रहे है। जैसे ही वे वृषभ राशि में अपना समय पूरा कर लेंगे तो उसके बाद ही वे मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन 15 जून बुधवार को होने जा रहा है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य पूजा करने की मान्यता है। सूर्य व्यक्ति के स्वास्थ्य, लोकप्रियता, नाम, प्रतिष्ठा, सफलता, उच्च पद आदि के लिए जिम्मेदार माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार जानिए मिथुन संक्रांति का महत्व और पुण्य काल :-
मिथुन संक्रांति का पुण्यकाल
मिथुन संक्रांति का पुण्य काल 15 जून बुधवार को दोपहर 12:18 से शुरु होकर शाम 07:20 तक रहेगा। इस दिन सूर्य की मीन संक्रांति का कुल समय 7 घंटे 2 मिनिट होगा। वहीं इसी दिन महापुण्यकाल दोपहर 12:18 से शुरु होकर 2:38 पर समाप्त होगा। इस दिन महापुण्यकाल की कुल अवधि 2 घंटा 20 मिनिट होगी।
सौर कैलेंडर के तीसरे माह की शुरुआत
सौर कैलेंडर के मुताबिक मिथुन संक्रांति से तीसरा माह मिथुन प्रारंभ हो जाएगा। इसके साथ ही हिंदू कैलेंडर का चौथा माह आषाढ़ शुरु होने वाला है। इस दिन आषाढ़ कृष्ण की प्रतिपदा तिथि है। सौर कैलेंडर में राशियों के क्रम के अनुसार ही 12 महीनो के नाम होते है। फिलहाल सौर कैलेंडर का दूसरा माह वृष चल रहा है। मीन इस कैलेंडर का 12वां माह होगा।
मिथुन संक्रांति पर स्नान-दान
मिथुन संक्रांति को शास्त्रों में बहुत ही उत्तम माना गया है। इस दिन सूर्य देव की पूजा विधि विधान से करनी चाहिए। हिंदू धर्म में इस त्यौहार का बहुत महत्व है। मिथुन संक्रांति के दिन पुण्य फल प्राप्त करने के लिए दान धर्म के कार्य किए जाते है। मिथुन संक्रांति के दिन जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद गेंहू, गुड़, घी, अनाज आदि का दान करने का महत्व है। इस दिन सूर्य भगवान का ध्यान करके दान करना चाहिए। यह दान किसी ब्राह्मण को करें।
Source;-“नईदुनिया”
