छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में धान की खरीदी को लेकर प्रशासन और शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में धान खरीदी को लेकर घोषणा हो सकती है। वहीं, माना जा रहा है कि सरकार इस बार भी धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये रखेगी।
- छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर तैयारियां तेज
- अक्टूबर के पहले सप्ताह में हो सकती है घोषणा
- प्रदेश में 3100 रुपये है धान का समर्थन मूल्य
- 1 नवंबर से शुरू हो सकती है धान खरीदी
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार इस बार धान की खरीदी एक नवंबर से शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के लिए सरकार अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में धान नीति जारी कर सकती है। जिसमें किसानों को इस बात की जानकारी दी जाएगी की इस बार धान की खरीदी कैसे की जाएगी। धान खरीदी के साथ-साथ सरकार बारदाने को लेकर भी नीति लागू कर सकती है।
3100 रुपये का समर्थन मूल्य
छत्तीसगढ़ में सरकार 3100 रुपये के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करती है। किसानों से इस बार भी धान खरीदी 3100 रुपये में की जाएगी। धान खरीदी की नीति सबसे पहले मंत्रिमंडलीय उपसचिव के समक्ष रखी जाएगी। यहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी लगते ही धान की खरीदी की सारी जानकारी किसानों को दी जाएगी।
1 नवंबर को दीपावली का त्योहार
इस बार दीपालली का त्योहार भी एक नवंबर को है। ऐसे में धान की खरीदी होगी या नहीं कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी। त्योहारों को देखते हुए धान खरीदी की तारीखों में विस्तार भी किया जा सकता है। धान खरीदी नीति के साथ-साथ मक्का खरीदी की नीति को भी कैबिनेट की मुहर लग सकती है। धान खरीदी नीति में इस बार कितनी धान खरीदी करना है इसका भी लक्ष्य तय किया जाएगा। पिछली बार सरकार ने 130 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा था।
माना जा रहा है कि पिछले साल की तुलना में इस साल धान खरीदी की लक्ष्य में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि की जा सकती है। वहीं, इस बार भी धान खरीदी की सीमा प्रति एकड़ 20 क्विंटल रहने की संभावना है।
बारदाने के लिए नहीं परेशान होंगे किसान
छत्तीसगढ़ सरकार इस बार नई बारदाना नीति के तहत धान की खरीदी कर सकती है। इसके तहत 50 फीसदी नए बारदाने और 50 फीसदी पुराने बारदानों का उपयोग किया जा सकता है। नए बारदानों की खरीदी जूट कमिश्नर कोलकाता से हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार का प्लान है कि बारदानों के कारण किसानों को धान विक्रय में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
SOURCE – PROMPT TIMES
