International Mathematics Day: इंटरनेशनल मैथ्स डे हर वर्ष 14 मार्च को मनाया जाता है. 2019 में यूनेस्को की ओर से इसकी शुरूआत की गई थी. 14 मार्च 1879 को मैथमेटिशियन पाई का जन्म हुआ था. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि मैथ्स के डर को छात्र कैसे दूर सकते हैं.
मैथ्स को स्टूडेंट्स एक कठिन विषय के तौर पर लेते हैं. वहीं बहुत से छात्र मैथ्स के नाम से ही डरते हैं, जबकि यह हमेशा से ही एग्जाम में एक स्कोरिंग विषय के तौर पर काम करता है. यह एक ऐसा विषय है, जिसमें राइटिंग का भी ज्यादा महत्व नहीं होता है और इसमें पूरे नंबर भी छात्र को मिलते हैं. इंटरनेशनल मैथ्स डे पर आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि भारत में बच्चे मैथ्य से क्यों डरते हैं और इसे कैसे दूर कर सकते हैं.
मैथ्स टीचर के अनुसार मैथ्स किराने के बिल की गणना से लेकर प्रकृति के पैटर्न को समझने तक हमारे जीवन के हर पहलू में है. यह एक ऐसा विषय है, जो समस्याओं को हल करने और हमे निर्णय लेने में भी मदद करता है.
ऐसे दूर करें मैथ्स से डर
मैथ्स का डर अक्सर गलत धारणाओं और नकारात्मक अनुभवों में होता है. हालांकि अपने दृष्टिकोण को नए सिरे से परिभाषित करके और गणित की उपयोगिता को अपनाकर छात्र इस डर को दूर कर सकते हैं. स्टूडेंट्स को इसे आसाना विषय के तौर कर लेना चाहिए और डरना नहीं चाहिए. मैथ्स से हमें दुनिया को समझने, गंभीर रूप से सोचने और भविष्य में निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है.
क्या हैं मैथ्स के फायदे?
यह तार्किक तर्क और आलोचनात्मक सोच के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है. मैथ्स अकादमिक रुप से भी बहुत ही महत्वपूर्ण है. गणित में महारत हासिल करने से व्यक्ति स्थितियों का विश्लेषण करने, परिकल्पना तैयार करने और साक्ष्य के आधार पर निष्कर्ष निकालने की क्षमता विकसित होती है. यह करियर में कई संभावनाएं भी पैदा करता है. मौजूदा समय में वित्त और प्रौद्योगिकी से लेकर स्वास्थ्य सेवा और इंजीनियरिंग तक विभिन्न उद्योगों में मैथ्स में एक्सपर्ट की बहुत डिमांड है.
