• June 6, 2026 4:41 pm

सूर्य देव के रथ में 7 घोड़े ही क्यों? क्या है इसके पीछे की कहानी

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27 दिसंबर 2023 !  हिंदू धर्म में सूर्य की पूजा की जाती है, ज्योतिष में कहा गया है कि जिस पर सूर्य देव कृपा बरसा दें उसको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. सूर्य भगवान सात घोड़ों के रथ पर सवार रहते हैं, सूर्य के रथ को संभालने वाले 7 घोड़ों को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं.ध्यान से देखने पर इन सातों घोड़ों के रंग में सूक्ष्म अंतर नजर आता है, इन घोड़ों की लगाम संभालते हैं अरुण देव और खुद सूर्य देवता पीछे रथ पर सवार होते हैं. धार्मिक कथाओं के अनुसार इन घोड़ों के नाम गायत्री, भ्राति, उष्निक, जगती, त्रिस्तप, अनुस्तप और पंक्ति हैं. मान्यता है कि ये सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते हैं.

हिंदू धर्म में 7 की संख्या को शुभ माना गया है. एक सप्ताह में भी 7 दिन ही रखे गए हैं. वैज्ञानिक दृष्टि से भी सूर्य की रोशनी यानी की धूप में भी सात रंग होते हैं. प्रिज्म यानि पारदर्शी कांच सूर्य की धूप को 7 अलग -अलग रंगों में बांट देता है. जब सूर्य की रोशनी प्रिज्म से होकर गुजरती है तब वो रोशनी 7 अलग -अलग रंगों में बट जाती है. इंद्रधनुष भी 7 रंगों का होता है. Surya dev के रथ को चलाने वाले सातों घोड़े, रोशनी के इन्ही 7 रंगों के प्रतीक माने जाते हैं. इसी कारण ये सातों घोड़े एक दूसरे से अलग दिखते हैं.
सूर्य देव के रथ के घोड़ों की तरह उनके रथ के पहिए का भी विशेष अर्थ है. इनके रथ के पहिए को 1 साल का प्रतीक माना जाता है. और पहिए में बनी हुई 12 लाइन,साल के 12 महीनो का संकेत मानी जाती हैं. भारत के कोणार्क मंदिर में Surya dev की उनके रथ के साथ बहुत सुंदर मूर्ति है जहां आप ये सब देख सकते हैं.
सोर्स :- ” TV9 भारतवर्ष    

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