02 फ़रवरी 2023 | बजट की सबसे प्रमुख बात 10 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय का आवंटन है, जो कि पिछली बार की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक है। साथ ही में राज्य सरकारों को आधारभूत संरचना निर्माण के लिए पूंजीगत व्यय के लिए 50 वर्षों तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा को बनाए रखा है। यह व्यय ज्यादातर सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट आदि के निर्माण पर दिया जाना है। वर्तमान में निजी निवेश में जो धीमापन आया है, उसे सार्वजनिक व्यय के माध्यम से प्रोत्साहित करने और आकर्षित करने का प्रयास किया गया है। वित्तमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए लगभग 45 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत किया। यह राशि वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। बजट में 12 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद वित्तमंत्री ने वित्तीय घाटे को जीडीपी के 5.9 प्रतिशत पर रखने की प्रतिबद्धता दर्शायी है, जो कि वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
वित्तमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट को अमृत काल के पहले बजट की संज्ञा दी। वित्त मंत्री ने बजट में नागरिकों के लिए अवसरों की सुविधा बनाने, विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के साथ ही स्थिरता मजबूत करने पर जोर दिया है। वर्तमान समय में विकास को तकनीक और ज्ञान के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है, जिससे उद्योगों और सेवाओं की कार्यक्षमता और उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए बजट में अनेक प्रविधान कृषि, शिक्षा, विनिर्माण उद्योग और डिजिटलाइजेशन की रूपरेखा बनाई गई है। बजट में, राजस्व प्राप्तियों में जहां एक ओर कर राजस्व में आशातीत वृद्धि हुई है, वहीं गैर कर राजस्व के लक्ष्यों को प्राप्त करना इस वर्ष भी आसान नहीं होगा। कर राजस्व में विशेषकर आयकर और जीएसटी में वृद्धि हुई, जबकि सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क में प्राप्ति लक्ष्य से कम रही है।
1798 करोड़ का नवीन ऋण
सरकार अपने खर्चों को पूरा करने के लिए 1798 करोड़ के नवीन ऋण लेने वाली है। सरकार द्वारा सब्सिडी में लगभग 1 लाख 47 हजार करोड़ की कमी की गई है, जो कि सर्वाधिक उर्वरक सब्सिडी में हैं। पेंशन और रक्षा व्यय को छोड़कर सबसे ज्यादा व्यय का प्रविधान ग्रामीण विकास के लिए रखा गया है, लेकिन यह संशोधित अनुमान से कम है। शिक्षा के व्यय में वृद्धि स्वास्थ्य की तुलना में अधिक है।
मनेरगा में कम, लेकिन पीएम आवास में अधिक
बजट के महत्वपूर्ण स्कीमों के अंतर्गत जहां एक ओर मनरेगा में बजट आवंटन कम किया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा मिशन तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आवंटन में संशोधित अनुमान की तुलना में वृद्धि की गई है। 2022-23 के बजट में इन योजनाओं के लिए जो बजट आवंटित किया गया था। उसकी तुलना में संशोधित अनुमान में कमी आई है। अर्थात आवंटित राशि व्यय नहीं की जा सकी है। बजट में लोक लुभावन नीतियों और कार्यक्रमों की जगह, समग्र समावेशी हरित विकास को वरीयता दी गई है, जिसमें मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। वित्तमंत्री ने बजट के सप्तऋषि लक्ष्य बताएं हैं। आशा की जानी चाहिए कि बजट इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होगा।
सोर्स :-“नईदुनिया”
