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एयरफोर्स में विंग कमांडर, 48 साल से महामंडलेश्वर और फिल्मों के हीरो… PM मोदी भी झुकाते थे शीश, कौन थे विवादों में रहने वाले पायलट बाबा?

ByPrompt Times

Aug 21, 2024
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रोहतास में पैदा हुए पायलट बाबा के बचपन का नाम कपिल सिंह है. उनकी सेना में भर्ती होने और फिर बॉलीवुड में एक्टिंग के बाद संन्यास लेने की यात्रा बेहद रोमांचक है. हमेशा से विवादों में रहे पायलट बाबा एक बार जेल भी जा चुके हैं.

 

जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा का लंबी बीमारी के बाद मुंबई में मंगलवार को निधन हो गया. हमेशा से विवादों में रहने वाले पायलट बाबा को हरिद्वार में समाधि दी जाएगी. इनके निधन पर देश विदेश में स्थित उनके सभी आश्रमों में शोक की लहर दौड़ गई है. वहीं जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरी गिरी महाराज ने भी जूना अखाड़े की सभी शाखाओं, आश्रमों और पीठों में तीन दिन का शोक घोषित करने के साथ शांति पाठ करने के निर्देश दिए हैं.

 

इस मौके पर लाजमी है कि पायलट बाबा के जीवन पर एक नजर डाली जाए. 86 साल उम्र पूरी कर चुके पायलट के बचपन का नाम कपिल सिंह था. बचपन से ही वह अक्रामक थे. संयोग मेधावी भी थे, इसलिए एयरफोर्स में पायलट बने और जल्दी ही प्रमोशन पाकर विंग कमांडर के पद तक पहुंचे. अपने सेवाकाल में पायलट बाबा ने पहले भारत चीन की लड़ाई में हिस्सा लिया और फिर दो बार भारत-पाक युद्ध में भी शामिल हुए और अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया. इसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था.

एक घटना से बदल गया जीवन

1971 में हुए भारत पाक युद्ध के दौरान एक ऐसी घटना हुई कि विंग कमांडर कपिल सिंह का संसार से मोह भंग हो गया और उन्होंने सन्यास लेने का फैसला कर लिया. दरअसल युद्ध के दौरान उनके विमान मिग-21 में कोई तकनीकी खामी आ गई. विंग कमांडर कपिल सिंह को लगा कि अब उनकी जिंदगी पूरी हो गई. उन्होंने अपने गुरु को याद किया. वह एक किताब में लिखते हैं कि उनके गुरु तुरंत कॉकपिट में आ गए और सुरक्षित लैंडिंग में उनकी मदद की. इससे कपिल सिंह को वैराग्य आने लगा और युद्ध खत्म होते ही उन्होंने वीआरएस अप्लाई कर दिया.

 

1974 में ली सन्यास की दीक्षा

रिटायरमेंट लेकर वह साल 1974 में विधिवत दीक्षा लिए और जूना अखाड़े में शामिल होकर सन्यासी बन गए. जूना अखाड़े में उन्हें साल 1998 में महामंडलेश्वर का पद मिला और फिर साल 2010 में उन्हें उज्जैन के प्राचीन जूना अखाड़ा शिवगिरी आश्रम नीलकंठ मंदिर में पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया. बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में रहने वाले एक राजपूत परिवार में पैदा हुए कपिल सिंह की शिक्षा दीक्षा बीएचयू से हुई. यहां पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन एयरफोर्स में पायलट अफसर के रूप में हो गया था.

पीएम मोदी भी झुकाते थे शीश

सेना से रिटायर होने के बाद वैराग्य की ओर बढ़ रहे कपिल सिंह ने कुछ दिन बॉलीवुड में भी रहे. उन्होंने एक फूल दो माली जैसी सफल फिल्में की. इसके बाद वह पूरी तरह से बैरागी बन गए. अध्यात्मिक जीवन अपनाने के बाद प्रसिद्ध अभिनेत्री मनीषा कोयराला को दीक्षा दी. वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत देश की कई बड़ी हस्तियां बाबा के सामने शीश झुकाती थीं. जूना अखाड़ा के संरक्षक श्री महंत हरि गिरी महाराज के मुताबिक बाबा की इच्छा थी कि उनकी समाधि हरिद्वार में हो, इसलिए आज बाबा को उनकी मंशा के मुताबिक समाधि दी जाएगी.

हमेशा विवादों में रहे पायलट बाबा

पायलट बाबा का विवादों से गहरा नाता था. सेना में नौकरी के दौरान उनके ऊपर मनमानी का आरोप लगा था. वहीं सन्यासी बनने के बाद पहला विवाद कुंभ मेले में भक्तों के ऊपर गाड़ी चढ़ाने के आरोप लगे. यह मामला साल 2010 के कुंभ का है. 14 अप्रैल को शाही स्नान के लिए जब पायलट बाबा का काफिला निकला तो कई लोग वाहनों से कुचल गए थे. वहीं कई लोग जान बचाने के लिए नदी में कूदे तो बह गए. इस संबंध में उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया. इसी प्रकार हाथरस में उनके चरणरज लेने के लिए भगदड़ मची. फिर नैनीताल में जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज हुआ. इस मामले में वह जेल भी गए थे. यही नहीं, बाबा का एक स्टिंग ऑपरेशन भी हुआ था, जिसमें वह काले धन को सफेद कर रहे थे.

नहीं देते थे विदेशी भक्तों की जानकारी

पायलट बाबा का आश्रम उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुमाल्टा गांव में है. यहां हमेशा देशी विदेशी भक्त आते जाते रहते हैं. हालांकि पायलट बाबा इनकी सूचना कभी भी पुलिस और प्रशासन को नहीं देते थे. जबकि ऐसा करना अनिवार्य होता है. इसको लेकर पुलिस हमेशा परेशान रहती थी. यही नहीं, पायलट बाबा ने अपने आश्रम के लिए न केवल सरकारी जमीन कब्जा ली, बल्कि संवेदनशील इलाके में हेलीपैड भी बना लिया था.

 

SOURCE – TV9 BHARATVARSH

 


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