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आम आदमी पर 20% बोझ और सरकार को सालाना 100 से 150 करोड़ का फायदा! MP का खजाना भरने वाला है ये फार्म्युला

ByPrompt Times

Oct 28, 2024
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मध्य प्रदेश सरकार दिवाली के बाद प्रॉपर्टी के दाम बढ़ा सकती है। एक बार फिर से कलेक्टर गाइडलाइन को बढ़ाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो प्रॉपर्टी के दाम 4 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। इससे सरकार को हर साल 100 से 150 करोड़ रुपए का फायदा भी होगा।

 

  • दिवाली के बाद बढ़ सकते हैं एमपी में प्रॉपर्टी के दाम
  • कलेक्टर गाइडलाइन के फिर से बढ़ने की संभावना
  • सरकार को कहना- रेवेन्यू में हो रहा नुकसान

 मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी खरीदना महंगा होने वाला है। दिवाली के बाद कलेक्टर गाइडलाइन फिर से बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर एक ही वित्तीय वर्ष में दूसरी बार कलेक्टर गाइडलाइन में बढ़ोतरी की तैयारी है। इससे घर खरीदारों को झटका लग सकता है। गाइडलाइन में 4 से 20% तक बढ़ोतरी होने की संभावना है।

 

सरकार का तर्क है कि कई इलाकों में कलेक्टर गाइडलाइन से कहीं ज्यादा कीमत पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हो रही है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है। इस कमी को पूरा करने और राजस्व बढ़ाने के लिए कलेक्टर गाइडलाइन में संशोधन किया जा रहा है।

 

पहले भी लिया था फैसला

गाइडलाइन में बढ़ोतरी का फैसला कोई नया नहीं है। इससे पहले 1 अप्रैल 2024 को भी कलेक्टर गाइडलाइन में बदलाव किया गया था। लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब एक ही वित्तीय वर्ष में दूसरी बार यह कदम उठाया जा रहा है।

 

आम लोगों को होगी परेशानी

राज्य सरकार के इस फैसले से घर खरीदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में कलेक्टर गाइडलाइन में बढ़ोतरी से आम आदमी का घर का सपना और भी दूर होता नजर आ रहा है।

 

कलेक्टर के सामने पेश करेंगे प्रस्ताव

भोपाल में सोमवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के सामने पंजीयन विभाग अपना प्रस्ताव रखेगा। इसके बाद सर्वे कर जमीनों के रेट रिवाइज किए जाएंगे। दिवाली के बाद नई दरें लागू होने की उम्मीद है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि नवंबर अंत या दिसंबर तक नई दरें लागू कर दी जाएं। इसके बाद बची हुई जगहों का सर्वे कराकर 1 अप्रैल 2025 को नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू की जाएगी।

 

सरकार को खजाना भरने की उम्मीद

इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क है कि योजनाओं के लिए जरूरी बजट जुटाने के लिए उसे बैंकों से कर्ज लेना पड़ रहा है। कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ाने से खजाने में कुछ हद तक बढ़ोतरी होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे उसे सालाना 100 से 150 करोड़ रुपए का फायदा होगा। जिन इलाकों में प्रॉपर्टी के दाम बढ़ाए जाएंगे, वहां यह देखा जा रहा है कि कलेक्टर गाइडलाइन वैल्यू से कितने अधिक पर रजिस्ट्री हुई हैं। उसी के आधार पर ये दाम बढ़ाए जाएंगे।

 

एआई से सर्वे कराकर लोकेशन चिन्हित

एम सेल्वेंद्रम, आईजी पंजीयन एवं मुद्रांक ने बताया कि, ‘उन लोकेशन को चिह्नित करने को कहा गया है, जहां पर गाइडलाइन से ज्यादा रेट पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। उनकी पहचान AI से कर ली गई है। ऐसी लोकेशन को भी चिह्नित किया जाएगा, जहां ज्यादा रजिस्ट्रियां हो रही हैं। सभी लोकेशन का सर्वे होगा।’

 

प्रॉपर्टी के दाम उन जगहों पर बढ़ेंगे जहां-

1. गाइडलाइन में तय दर से अधिक दाम पर रजिस्ट्री कराई गई हैं। ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है।
2. नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं, तो उनके आसपास प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त बढ़ी है। इंडस्ट्रियल एरिया के आसपास बसाहट बढ़ी है।
3. जहां बिजली, पानी और ट्रांसपोर्टेशन के नए रूट्स बने हैं। वहां तेजी से प्रॉपर्टी के सौदे हो रहे हैं।
4. मेट्रो और नई फोर और सिक्सलेन बन रही हैं। इसलिए नए प्रोजेक्ट में निवेश बढ़ा है।

 

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश में पहले ही देश की सबसे ज्यादा 9.5% स्टांप ड्यूटी है। रजिस्ट्रेशन चार्ज भी 3% होने से प्रॉपर्टी खरीदने में अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं। महिलाओं को स्टाम्प ड्यूटी में 2% की छूट मिलती है। फिर भी एक साल में दो-दो बार कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है। इससे आम लोगों के लिए प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा।

 

SOURCE – PROMPT TIMES


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