21 जुलाई 2023 ! केंद्र और राज्य की सरकारों के विकास के तमाम दावों के बावजूद राजस्थान में अब भी 60 प्रतिशत आबादी बिना गैस सिलेंडर चूल्हे पर रोटी बना रही है।
34 प्रतिशत आबादी को पूरा पोषण नहीं मिल पा रहा। वहीं लाखों लोगों के पास पीने का पानी, बिजली और यहां तक कि रेडियो, मोबाइल या टीवी तक नहीं है।
हालांकि पिछले 5 साल में 1 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। सबसे कम गरीब कोटा में हैं, इसके बाद राजधानी जयपुर में। ये खुलासा हाल ही में आई नीति आयोग की मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स रिपोर्ट में हुआ है।
भास्कर ने इस रिपोर्ट में राजस्थान में गरीबी, पोषण, मृत्यु दर, हेल्थ, पढ़ाई, स्कूल अटेंडेंस, सेनिटेशन, पानी-बिजली, हाउसिंग को लेकर आए सर्वे की पड़ताल की।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान में अब भी 15.31 प्रतिशत लोग गरीब हैं। हालांकि, 2015-16 में हुए नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे के अनुसार राजस्थान में 28.86 प्रतिशत लोग गरीब थे।
वर्तमान सर्वे में ये 13.55 प्रतिशत घटकर 15.31 प्रतिशत हो गए हैं। शहरों के मुकाबले राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से गरीबी ज्यादा घटी है। चार साल में जहां ग्रामीण इलाकों में 34.53 प्रतिशत के मुकाबले गरीबी घटकर 18.62 प्रतिशत रह गई है।
अगर शहरी क्षेत्र की बात करें तो 11.21 प्रतिशत के मुकाबले यह घटकर 4.54 प्रतिशत हो गई है।नीति आयोग की इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि इन चार साल में 1 करोड़ 8 लाख 16 हजार 230 लोग गरीबी से बाहर आए हैं। ये पूरे देश में यूपी, बिहार और एमपी के बाद सर्वाधिक है।
शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान में काफी सुधार हुआ है। पूरे देश में बच्चों की स्कूलिंग और परिवार में शिक्षा को बढ़ावा देने में राजस्थान सबसे आगे है।
इन चार वर्ष में राजस्थान में अब सिर्फ 10.06 प्रतिशत परिवार ही ऐसे रह गए हैं जिनमें परिवार के किसी सदस्य ने प्राइमरी तक की पढ़ाई नहीं की है। 2015-16 में यह आंकड़ा 17.09 प्रतिशत था।
पूरे देश में इस मामले में सबसे ज्यादा सुधार राजस्थान ने किया है। वहीं बैंक या पोस्ट ऑफिस में अकाउंट के मामले में भी राजस्थान तमाम बड़े राज्यों में सबसे आगे है।
राजस्थान में अब सिर्फ 2.18 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जिनके परिवार में से किसी भी सदस्य का बैंक या पोस्ट ऑफिस में अकाउंट नहीं है।
हालांकि इन सबके बावजूद पोषण, पीने का पानी, पक्के घर, सिलेंडर, टॉयलेटस के मामले में राजस्थान काफी पिछड़ा हुआ है।
राजस्थान में अब भी 34.09 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका परिवार पूर्ण रूप से पोषित नहीं है। वहीं राजस्थान के 60 प्रतिशत से ज्यादा घरों में आज भी सिलेंडर नहीं है।
वहां आज भी चूल्हे पर खाना बनता है। इसके अलावा 29 प्रतिशत से ज्यादा परिवार ऐसे हैं जहां आज भी घर का एक्सक्लूसिव टॉयलेट नहीं है।
वहीं 10 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा 45 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास राजस्थान में अब भी पक्के मकान नहीं हैं। वहीं 10 प्रतिशत से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनके पास संपत्ति के नाम पर कुछ नहीं हैं।
राजस्थान में 5 साल में 1 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आ गए। 2015-16 में 28.68 प्रतिशत लोग गरीब थे। जबकि 2019-21 के सर्वे में 15.31 प्रतिशत लोग गरीब रहे।
इस दौरान 1 करोड़ 8 लाख 16 हजार 230 लोग गरीबी से बाहर आ गए। राजस्थान देश की कुल आबादी का 5.82 प्रतिशत हिस्सा शेयर करता है।
राजस्थान के अलावा यूपी से 3.42 करोड़, बिहार से 2.25 करोड़, एमपी से 1.35 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ गए।
सोर्स :- “दैनिक भास्कर”
