22जनवरी 2024
सीतामढ़ी: वर्ष 1990 से लेकर 1992 तक अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनों ने आंदोलन छेड़ दिया था। बीजेपी के इसमें दो मुख्य कार्यक्रम थे “जानकी कलश रथयात्रा” और अयोध्या तक “कारसेवा”। इन दोनों कार्यक्रमों में देश के लाखों लोगों ने भाग लिया था। रामभक्तों को तरह-तरह की यातनाएं झेलनी पड़ी थी, पुलिस की लाठियां खानी पड़ी थी और न जाने कितने रामभक्तों को जेल भी जाना पड़ा था। फिर भी लोगों की हिम्मत नहीं टूटी थी। वह हिम्मत आज भी बरकरार है। दोनों ही कार्यक्रम में भागीदार रहे थे सीतामढ़ी जिला के बसंत कुमार मिश्र भी। मिश्रा ने NBT से “जानकी कलश यात्रा” और जेल जाने की अनसुनी कहानी बयां की।
आडवाणी के नेतृत्व में रथयात्रा
बसंत कुमार मिश्रा फिलहाल सीमा जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष है। बताया कि 20 अक्तूबर 1990 को श्रीराम मंदिर आंदोलन के तहत लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में रथयात्रा निकली थी। इधर, मिश्रा के नेतृत्व में जानकी कलश रथयात्रा निकली थी। यह यात्रा जानकी स्थान से निकाली गई थी। उस दौरान बसंत भाजपा के जिला महामंत्री थे। जानकी कलश पुनौरा धाम, सुरसंड, भिठ्ठामोड़ होते हुए नेपाल के जनकपुर तक गयी। 22 अक्टूबर शाम 7:30 बजे रात को जनकपुर से लौट आयी थी। उन्होंने बताया, ‘आडवाणी जी के सीतामढ़ी आगमन की बात बताकर पुलिस ने उन्हें थाने पर बुला कर बैठा लिया। फिर उन्हें अरेस्ट कर लिया गया।’
दनादन होने लगी थी गिरफ्तारियां
उन्होंने बताया ‘थाना में बैठे ही थे तभी मालूम हुआ कि समस्तीपुर में थोड़ी देर बाद लाल कृष्ण आडवाणी को भी अरेस्ट कर लिया जाएगा। 23 अक्टूबर को आडवाणी जी को कलश स्थापना करनी थी। उन्हें जानकी कलश को सीता कलश के रूप में सौंपना था, जिसे लेकर आडवाणी जी को अयोध्या जाना था। रात 10:00 बजे सूचना मिली कि आडवाणी जी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। फिर भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष ललित प्रसाद सिंह, जैन सिंह, प्रांत के अधिकारी रामदेव महतो समेत अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया। सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
सेंट्रल जेल में रामभक्त रहे थे एक महीने
मिश्रा ने बताया कि मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल में करीब एक माह रहना पड़ा था। सीतामढ़ी जिला के सैकड़ों रामभक्तों की अरेस्टिंग हुई थी। सभी मुजफ्फरपुर जेल में ही थे। उन्होंने बताया कि ‘हमलोग जेल में थे, उस वक्त लगता था कि जन सैलाब हम लोगों के उद्गार के लिए उमड़ पड़ा था। छठ का समय था। जेल में राममय दृश्य हो गया था। लगता था कि जेल में नहीं बल्कि हमलोग किसी मंदिर में हैं। रामजी की कृपा से फिर 1993 में भी सीतामढ़ी से बड़ी संख्या में लोग कार सेवा करने श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या गये। उस दौरान ऐसा लग रहा था जैसे कार सेवा का नेतृत्व भगवान श्री राम स्वयं कर रहे हों। हमने प्रभु श्रीराम के मंदिर के लिए ईंटों का संग्रह किया। तब लगा कि हमारा जन्म धन्य हो गया। राममय हृदय, संपूर्ण शरीर राममय हो गया। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा देख वर्षों पुराना सपना साकार हो रहा है।’
स्रोत:- “नवभारतटाइम्स”
