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आतंकी हमले के बीच चीनी उप-प्रधानमंत्री का स्वागत; BRI में शामिल होकर पछता रहा इटली

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31 जुलाई 2023 ! 2013 में चीन और पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बिजनेस बढ़ाने के लिए चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC की शुरुआत की थी। ये कॉरिडोर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनीशिटिव (BRI) के तहत शुरू किया गया था। इस साल CPEC और BRI के दस साल पूरे हो चुके हैं। चीन और पाकिस्तान का CPEC प्रोजेक्ट PoK से होकर गुजरता है।

इसके चलते भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। इन प्रोजेक्ट्स की दसवीं सालगिरहा मनाने के लिए रविवार को एक तरफ जहां चीन के वाइस प्रीमियर यानी उप प्रधानमंत्री ही लिफेंग इस्लामाबाद पहुंचे।

वहीं, पाकिस्तान में रविवार को खैबर पख्तूनख्वा राज्य के बाजौर में आतंकी हमले में 44 लोगों की मौत हो गई। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है। इसके बावजूद इस्लामाबाद की सरकारी इमारतों को रोशनी जगमगाया गया है। सड़कों पर चीन और पाकिस्तान के झंडे लगाए गए हैं।

CPEC के तहत चीन पाकिस्तान में ट्रांसपोर्ट, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रकटर प्रोजेक्टस में 60 अरब डॉलर (करीब 4.9 लाख करोड़ रुपए) का निवेश कर रहा है। अब तक इस पर करीब 40 अरब डॉलर खर्च भी हो चुके हैं। इस्लामाबाद युनिवर्सिटी के प्रोफेसर अजीम खालिद का कहना है कि अब तक CPEC के मिले-जुले नतीजे देखने को मिले हैं।

पाकिस्तान के नेता चीन से दोस्ती को हिमालय से मजबूत, समुद्र से गहरी और शहद से मीठी बताते हैं। हालांकि, ये दोस्ती आतंक की चपेट में है। दरअसल, CPEC चीन के शिनजिआंग इलाके को पाकिस्तान में बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है।

शुरुआत में दावा किया गया था कि इस प्रोजेक्ट से बलूचिस्तान के लोगों को फायदा मिलेगा। हालांकि, ये दावा गलत साबित हुआ। नतीजा ये रहा कि बलूच अलगाववादी संगठन BLA ने CPEC के प्रोजेक्ट्स पर कई हमले किए। सरकार को ये हमले रोकने के लिए वहां AK 47 के साथ हजारों सैनिकों को तैनात करना पड़ा है।

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि चीन कर्ज देने के लिए ज्यादातर ऐसे देशों को चुनता है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार या उसके अपने ट्रेड रूट में कोई अहम स्थान रखते हों। वो इन देशों में ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लोन देता है। इन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से ज्यादातर वो होते हैं जो किसी न किसी रूप में चीन के लिए जरूरी होते हैं।

वो कई ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए भी लोन देता है जो उस देश के लिए किसी काम के नहीं होते। पाकिस्तान को दिया गया चीन का ज्यादातर कर्ज चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के नाम पर है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कॉरिडोर का कुछ हिस्सा चीन रणनीतिक रूप से काफी जरूरी मानता है। इस जरूरी हिस्से का काम चीन लगभग पूरा कर चुका है। अब उसने CPEC में निवेश भी घटाना शुरू कर दिया है। चीन ने श्रीलंका के बाद अपने फायदे के लिए पाकिस्तान को भी कर्ज के जाल में फंसा लिया है।

इटली के रक्षा मंत्री का एक बयान काफी चर्चा में है। इसमें वो कहते हैं- चार साल पहले चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना (BRI) में शामिल होना जल्दबाजी में लिया गया और तबाह करने वाला फैसला था।

रविवार को इटली के रक्षा मंत्री गोइदो क्रोसेटो ने ये बात एक इंटरव्यू के दौरान कही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश के निर्यात को उम्मीद के मुताबिक बढ़ावा नहीं मिला।

गोइदो क्रोसेटो ने ‘कोरियरे डेला सेरा’ नाम के इटालियन अखबार से कहा- नए सिल्क रोड में शामिल होने का फ़ैसला जल्दबाजी में लिया गया और तबाह करने वाला कदम था। जिसकी वजह से चीन का निर्यात इटली में कई गुना बढ़ा, लेकिन चीन में इटली के निर्यात पर इससे उतना असर नहीं पड़ा।

इटली की पिछली सरकार ने मार्च 2019 में चीन के साथ BRI को लेकर समझौता किया था। इटली ऐसा करने वाला वो पश्चिमी का इकलौता विकसित पश्चिमी देश था। बाकी सभी देश चीन के BRI प्रोजेक्ट को दबादबा बढ़ाने का पैंतरा बता रहे थे।

2018 में इटली की वित्त मंत्री जियोवानी ट्रिया के चीन दौर के बाद इटली ने इसमें शामिल होने का फैसला किया था। तब अमेरिका, यूरोपीय संघ और पश्चिम के उसके दूसरे सहयोगियों ने इसके लिए इटली की आलोचना की थी।

इसी साल मई में इटली की नई प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने संकेत दिए थे कि इटली इस समझौते से बाहर निकलना चाहता है। उन्होंने कहा था कि बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट से बाहर निकलने के बाद भी चीन के साथ बेहतर संबंध रखना असंभव नहीं है।

सोर्स :- “दैनिक भास्कर”                      


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