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छत्तीसगढ़ के कम्युनिटी पुलिसिंग-हमारी उपलब्धि-लॉकडाउन में महिलाओं पर अत्याचार बढ़े, पुलिस ने चलाया चुप्पी तोड़ अभियान, ये अब देश 12 जिलों में होगा प्रयोग

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5 जनवरी 2022 | राजधानी में पिछले लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के साथ महिलाओं पर अत्याचार बढ़ गए। घरेलू हिंसा से परेशान महिलाओं पुलिस में शिकायतें की। केवल रायपुर शहर के अलग-अलग थानों में तीन हजार शिकायतें पहुंची। परंतु शिकायत करने के बाद ज्यादातर महिलाएं अपराध दर्ज करवाने नहीं आईं। पुलिस ने इसकी पड़ताल की तो पता चला परिवार की बदनामी के भय से महिलाएं अपराध दर्ज करवाने थाने नहीं पहुंच रही हैं।

पुलिस ने ऐसी महिलाओं से संपर्क किया। उनके घर पहुंचकर जानकारी ली। ऐसी महिलाओं की शिकायत सुनने और तुरंत कार्रवाई के लिए अलग से सेल बनायी। सेल के माध्यम से रोज पीड़ित महिलाओं को फोन कर पूछा जाता- आपको कोई तकलीफ तो नहीं? नेशनल पुलिस मिशन गृह मंत्रालय ने कम्युनिटी पुलिसिंग के इस फार्मूले को पुरस्कृत करने के साथ देश के अलग-अलग राज्यों के 12 जिलों में प्रयोग के तौर पर आजमाने का फैसला लिया गया है। देश के उन जिलों में प्रयोग सफल होने पर उस मॉडल को देश के कई शहरों में लागू किया जाएगा।

अफसरों के अनुसार लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद भी कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत चलाया गया ये अभियान काफी चर्चा में रहा। महिलाओं के साथ हिंसा के मामले में शहर के एक-दो नहीं कई थानों में रोज पहुंच रहे थे। एक माह के भीतर ही 3 हजार से ज्यादा शिकातयें अलग-अलग थानों में पहुंच गई थीं। ऐसी शिकायतों की संख्या अचानक बढ़ने से तत्कालीन एसएसपी आरिफ शेख ने उनकी समीक्षा करवायी। इस दौरान पता चला कि महिलाएं शिकायतें तो कर रही हैं, लेकिन अपराध दर्ज करवाने से पीछे हट रही हैं। पुलिस ने पीड़ित महिलाओं से संपर्क किया। उनकी शिकायतों में दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल किया। उनसे परिवार के बारे में जानकारी ली गई।

ऐसे आवेदन जिनमें फोन नंबर नहीं थे, उनके पते पर पुलिस पहुंची। उनका फोन नंबर लिया गया। उसके बाद कंट्रोल रूम में अलग से सेल बनाकर रोज उन तीन हजार महिलाओं में 100 को फोन किया जाने लगा। महिला पुलिस अधिकारी-कर्मचारी महिलाओं से फोन पर पूछते थे, कि उन्हें अब घर में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं हो रही है? कोई रिश्तेदार या पति उन्हें तंग तो नहीं कर रहा है? इस तरह लगातार उनसे संपर्क कर उनका हालचाल पूछा जाने लगा। इसका असर ये हुआ कि उन परिवारों में घरेलू हिंसा बंद हो गई। इस कांसेप्ट को चुप्पी तोड़ अभियान का नाम दिया गया था।

महिला कमांडो का फार्मूला भी सराहा
शहर में खासतौर पर झुग्गी बस्ती में अड्‌डेबाजी और नशाखोरी कम करने के लिए महिला कमांडो के नाम से नया फार्मूला लांच किया गया। इस अभियान में स्लम और झुग्गी इलाकों में जहां गुंडागर्दी और नशे के कारोबार ज्यादा चलने की शिकायत थी वहां उसी इलाके की महिलाओं को कमांडो बनाकर फील्ड में उतारा गया। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं को पूरे इलाके में सुरक्षा व निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। हाथों में लाठियां लेकर महिला कमांडो ने अपने इलाके में नियमित गश्त कर सड़क पर अड्‌डेबाजी करने वालों को खदेड़ा।

महिला कमांडो की टीम के डर से गली मोहल्लों में चलने वाले नशे के कारोबार पर अंकुश लगा। इसी फार्मूले को रायपुर के अलावा बिलासपुर और बालोद में भी लागू किया गयास था। बिलासपुर में ही स्लम इलाके की महिलाओं को ई रिक्शा दिलाया गया। उनके माध्यम से पिंक लाइन एक्सप्रेस शुरू करवायी गई। इसका रुट रेलवे स्टेशन से महिला कॉलेज और हाॅस्टल के अलावा महिलाओं से जुड़े संस्थानों के बीच तय किया गया। पिंक एक्सप्रेस में केवल महिला सवारियों को ही बैठने की अनुमति थी। ये फार्मूला भी खासा चर्चित रहा।

कई राज्यों ने दिया प्रेजेंटेशन
नेशनल पुलिस मिशन के तहत ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट गृह मंत्रालय द्वारा कम्युनिटी पुलिसिंग को लेकर तीसरी नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। कांफ्रेंस में कई राज्यों के आला अफसरों ने प्रेजेंटेशन दिया। किसी शहर में युवाओं की सुरक्षा के लिए प्रयोग किया जा रहा है, तो कहीं बुजुर्गों को राहत देने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ ऐसे राज्य भी हैं, जहां रोजगार के लिए पुलिस ने अवसर उपलब्ध कराए हैं। छत्तीसगढ़ से डीआईजी आरिफ शेख ने प्रेजेंटेशन दिया। दो दिन के कांफ्रेंस में यहां के प्रयोग को न सिर्फ पुरस्कृत किया गया बल्कि इसे देश के अलग-अलग राज्यों में प्रयोग के लिए सलेक्ट भी कर लिया गया है।

Source;-“दैनिक भास्कर”


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