05 जनवरी 2022 | कोरोना के इलाज के प्रिस्केप्शन में इस बार अमेरिकी दवा मोलुनुपीरावीर टेबलेट शामिल की जा रही है। इस टेबलेट को ड्रग कंटोलर ऑफ इंडिया ने आपात स्थिति को देखते हुए मंजूरी दे दी है। दिसंबर में लांच हुई इस दवा के 10 हजार से ज्यादा डोज प्रदेश के दवा कारोबारियों को सप्लाई हुए हैं। एक मरीज के लिए 40 टेबलेट की डोज तय है। अलग-अलग कंपनियों के हिसाब से इस पूरे डोज का रेट दो से ढाई हजार रुपए होगा।
भारत में एक साथ 15 कंपनियां प्रोडक्शन कर रही हैं, इसलिए स्टाॅक कम नहीं होगा। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार अभी भी सामान्य लक्षण वाले मरीजों को पैरासिटामॉल और कफ सिरप से ही इलाज किया जाएगा। अंबेडकर अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड के इंचार्ज डाक्टर का कहना है कि मोलुनुपीरावीर टैबलेट संक्रमण के 5 दिन के भीतर ही कारगर है। अगर मरीज को सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई तो यह असरदार नहीं है। भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर से मंजूरी मिलने के बाद से दवा कारोबारियों ने मोलुनुपीरावीर टेबलेट के आर्डर देने शुरू कर दिया है।
कारोबारियों के अनुसार दो दिन में करीब 5 करोड़ की दवा के आर्डर दिए जा चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये एंटी वायरल ड्रग है जो वायरस को शरीर में मल्टीप्लाई होने यानी तेजी से बढ़ने से रोकती है। इससे संक्रमण नहीं बढ़ता और माइल्ड हो जाता है। यूएस में यह दवा खासतौर पर कोरोना के मरीजों के लिए तैयार की गई है। कोरोना की पहली लहर में टैमीफ्लू टेबलेट, दूसरी लहर में फेबिपीरावीर और रेमडेसिवीर इंजेक्शन से इलाज हुआ था। इनके अलावा पैरासिटामॉल और जिंक टेबलेट भी खूब बिकीं। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कृपलानी ने बताया कि यह टैबलेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बाजार में इसकी किल्लत नहीं होगी। विशेषज्ञों और दवा कारोबारियों के अनुसार भारत में एक साथ 15 अलग-अलग कंपनियां इसका प्रोडक्शन कर रही हैं। ऐसी फेवीपीरावीर टेबलेट या रेमडेसीवीर इंजेक्शन की तरह इस दवा की ब्लैक मार्केटिंग की गुंजाइश नहीं होगी। उल्टे दवा की कीमत आने वाले दिनों में कम होगी।
डॉ. सुंदरानी ने कहा- अगर सांस में दिक्कत होने लगी तो असरदार नहीं
अंबेडकर अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड के इंचार्ज डा. हरीश सुंदरानी का कहना है कि ये नई दवा संक्रमण के मल्टीप्लेक्शन को रोकती है। मोलुनुपीरावीर से संक्रमण कम होता है, लेकिन ये केवल तभी कारगर होती है, जब संक्रमण के 5 दिनों के भीतर दी जाए। ऐसे मरीज जिन्हें सांस में दिक्कत होने लगे और ऑक्सीजन लगानी पड़े, उनपर यह दवा असर नहीं करेगी।
Source :- ” दैनिक भास्कर “
