10 जुलाई 2023 ! अधिसूचना में महिला अभ्यर्थियों की छाती मापने की शर्त भी रखी गई है. यह शर्त ‘शारीरिक माप परीक्षण’ के तौर पर रखी गई है.
आयोग की अधिसूचना में बताया गया है कि रेंजर, डिप्टी रेंजर और फॉरेस्टर पदों के लिए महिला उम्मीदवारों की छाती बिन फुलाए 74 सेमी और फुलाने के बाद 79 सेमी होनी चाहिए.
विपक्ष ने इसे मनोहर लाल खट्टर सरकार की मनमानी करार दिया है.
इस अधिसूचना में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की छाती का माप भी तय किया गया है. पुरुषों के लिए छाती बिन फुलाए 79 सेमी और फुलाने के बाद 84 सेमी होनी चाहिए.
इस अधिसूचना में अन्य पदों के लिए ये पैमाने अलग-अलग रखे गए हैं.
इस अधिसूचना के बाद राज्य में विवाद खड़ा हो गया है. सामाजिक कार्यकर्ता इसे महिला विरोधी बता रहे हैं. राज्य के बड़े नेताओं ने भी इस अधिसूचना का विरोध किया है.
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसका विरोध करते हुए एक ट्वीट किया है. उन्होंने कहा कि यह नोटिफिकेशन महिलाओं की गरिमा के साथ खिलवाड़ है.
वीडियो ट्वीट करते हुए सुरजेवाला ने लिखा, “खट्टर सरकार का नया तुगलकी फरमान! अब हरियाणा की बेटियों की “छातियाँ मापेंगे”- फारेस्ट रेंजर और डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर की भर्ती के लिए!”
ट्वीट में उन्होंने आगे लिखा, “क्या खट्टर जी-दुष्यंत चौटाला जानते नहीं कि हरियाणा में महिला पुलिस कॉन्स्टेबल और महिला SI पुलिस की भर्ती में भी उम्मीदवार युवतियों की ‘छाती’ नहीं मापी जाती?”
“क्या खट्टर जी-दुष्यंत चौटाला जानते नहीं कि सेंट्रल पुलिस ऑर्गेनाइज़ेशन में भी महिलाओं की ‘छाती’ मापने का कोई मापदंड नही? फिर हरियाणा की बेटियों को अपमानित करने के लिए फारेस्ट रेंजर और डिप्टी रेंजर की भर्ती में ये क्रूरतापूर्ण, बचकाना और बेवकूफ़ाना शर्त क्यों?”
HSSC द्वारा शारीरिक माप परीक्षा के माध्यम से ‘ग्रुप सी’ पदों (द्वितीय चरण) की भर्ती के संबंध में 7 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई थी.
इसमें सभी टेस्ट 13 जुलाई से 23 जुलाई के बीच होने तय किए गए हैं.
दूसरे पेज पर शारीरिक माप वाले कॉलम में महिला और पुरुष वन रेंजर और डिप्टी रेंजर की छाती की माप लिखी गई है.
इसमें बिन फुलाए और फुलाने के बाद छाती का माप का वर्णन किया गया है.
वहीं इंडियन नेशनल लोकदल के महासचिव अभय चौटाला ने भी फॉरेस्ट रेंजर और डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर की भर्ती में महिलाओं की छाती मापने वाली अधिसूचना को बचकाना, शर्मनाक और महिला विरोधी करार दिया है.
चौटाला ने कहा, “इसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है. यह हमारी बेटियों का अपमान है. भाजपा सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए.”
पिछले कई वर्षों से हरियाणा में शिक्षा और भर्ती के लिए आवाज उठा रही सामाजिक कार्यकर्ता श्वेता ढुल ने कहा है कि इस अधिसूचना के कारण वन विभाग में नौकरियों के लिए आवेदन करने वाली कई महिलाएं डर गई हैं.
उनके अनुसार, महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि यह प्रक्रिया कैसे काम करेगी.
वो कहती हैं, “उनके पतियों ने उनका शारीरिक परीक्षण करने से इनकार कर दिया या यदि कोई इसके उद्देश्य के बारे में पूछे तो उसका उत्तर क्या है. यह सब समझ से परे है.”
उनका कहना है, ”यह सब साफ़ तौर पर महिलाओं से छेड़छाड़ करने का मामला है.”
श्वेता बताती हैं, “यह उन्हें परेशान करना हुआ. 2017 में मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की परीक्षा की घोषणा की गई थी, लेकिन विरोध के कारण सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था.”
श्वेता हरियाणा में पुलिस भर्ती के दौरान ऐसे किसी टेस्ट की ज़रूरत न होने की बात भी बताती हैं.
वे कहती हैं, ”केंद्रीय बलों में शामिल होने के लिए महिलाओं के लिए ऐसा कोई शारीरिक मानदंड नहीं रखा गया है. महिला आईपीएस अधिकारियों के लिए भी ऐसा कोई नियम या क़ानून नहीं है.’
सोर्स :-“BBC न्यूज़ हिंदी”
