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श्रीलंका में राष्ट्रपति भवन में घुसने वाले प्रदर्शनकारी अब निराश क्यों

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10 जुलाई 2023 ! श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति भवन में घुसने के कुछ दिन बाद कालूथांत्री का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो एक बेड पर राष्ट्रपति के ध्वज को लपेटे सोये थे.

युवाओं के राष्ट्रपति भवन के भीतर बने स्वीमिंग पूल में कूदते हुए और आलीशान बेड पर उछलते हुए तस्वीरें इससे पहले ही दुनियाभर में वायरल हो गईं थीं.

कालूथांत्री का वीडियो उन सभी काव्यात्मक प्रमाणों का हिस्सा हो गया था, जिनसे पता चल रहा था कि कैसे श्रीलंका के लाखों लोग भ्रष्ट और अयोग्य समझी जाने वाले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के शासन से तंग आए थे.

इसके बाद जल्द ही राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए और कुछ दिन बाद पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया. इसे अभूतपूर्व जनआंदोलन की एक बड़ी जीत के रूप में पेश किया गया था, लेकिन इसके एक साल बाद श्रीलंका बहुत अलग नज़र आता है.

साल 2022 की शुरुआत में, श्रीलंका में महंगाई तेज़ी से बढ़ी. विदेशी मुद्रा भंडार ख़ाली हो गया और देश में ईंधन, खाद्य सामग्री और दवाओं की किल्लत हो गई.

देश की आज़ादी के बाद के इस सबसे बुरे आर्थिक संकट में लोगों को दिन में 13 घंटों तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ा.

बहुत से लोगों ने इन हालात के लिए राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और उनके परिवार को ज़िम्मेदार बताया. उनकी ख़राब आर्थिक नीतियों को विदेशी मुद्रा भंडार ख़ाली होने की वजह माना गया.

राजपक्षे परिवार पर भ्रष्टाचार करने और जनता के पैसों को ठिकाने लगाने के आरोप भी लगे.

लेकिन राजपक्षे परिवार ने इन सभी आरोपों को ख़ारिज कर आर्थिक हालात के कुछ और ही कारण बताये. तर्क दिया गया कि कोविड महामारी के बाद पर्यटन में आई गिरावट और यूक्रेन युद्ध के बाद तेल के बढ़ते दाम संकट की वजह बनें.

पिछले साल जब राजधानी कोलंबो के चर्चित सार्वजनिक स्थल गाले फेस ग्रीन पर लोगों की भारी भीड़ जुटी तब मैं भी कोलंबो में ही था.

प्रदर्शन दिन-रात जारी रहे, शाम के वक़्त भीड़ और ज़्यादा बढ़ जाती. परिवार, छात्र, पादरी, क्लर्क, बौद्ध भिक्षु, सभी तरह के लोग इन प्रदर्शनों का हिस्सा होते.

गोटा गो होम का नारा देशभर में गूंजने लगा और इन प्रदर्शनों ने श्रीलंका के तीन मुख्य समुदायों- सिंहला, तमिल और मुसलमानों, को एकजुट कर दिया.

कुछ सप्ताह बाद प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति भवन में घुसने के साथ ये प्रदर्शन अपने अंजाम तक पहुंचे. प्रदर्शनकारियों का मक़सद राजपक्षे को सत्ता से बाहर करना था. कालूथांत्री भी राष्ट्रपति भवन में घुसने वाले लोगों में शामिल थे.

जब प्रदर्शनकारी महल में घुसे, राजपक्षे वहाँ नहीं थे. प्रदर्शनकारियों ने इसे अपना ही घर बना लिया और जब यहाँ से गए तो किताबों से लेकर बेड शीट तक यादगार के रूप में उठा ले गए.

कालूथांत्री कहते हैं, “मैं राष्ट्रपति के ध्वज अपने साथ ले गया क्योंकि मैंने सोचा था कि उन अधिकारिक प्रतीकों के बिना राजपक्षे राष्ट्रपति की तरह काम नहीं कर पाएंगे.”

श्रीलंका में राष्ट्रपति के ध्वज हर राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अलग होते हैं और जब कोई नया राष्ट्रपति कार्यभार संभालता है तो ये ध्वज भी बदल जाते हैं.

सोर्स :-“BBC  न्यूज़ हिंदी”                                  


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